'मेकेदातु परियोजना ही कावेरी विवाद का स्थायी समाधान', कर्नाटक सीएम ने की जलाशय निर्माण तेज करने की वकालत
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना को कावेरी जल विवाद का स्थायी समाधान बताया और सभी पक्षों के सहयोग से जल्द निर्माण शुरू करने की वकालत की.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना कावेरी जल विवाद का स्थायी समाधान साबित हो सकती है. कावेरी मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अब इस परियोजना को और अधिक समय गंवाए बिना आगे बढ़ाया जाना चाहिए. उनका कहना था कि इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय अपना फैसला दे चुका है और केंद्र सरकार भी अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी है.
'अब और देरी नहीं होनी चाहिए'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए परियोजना पर तेजी से काम शुरू किया जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक राज्य को अधिक या कम पानी मिलने का नहीं, बल्कि उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का है. उनके अनुसार, मेकेदातु जलाशय भविष्य की जल आवश्यकताओं और पेयजल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है.
दोनों राज्यों के बीच संवाद पर दिया जोर
डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच बातचीत के जरिए इस मुद्दे का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जाना चाहिए. उन्होंने दोनों राज्यों से संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और सहयोग की भावना से काम करने की अपील की. मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दल और संबंधित पक्ष इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे.
Also Read
केंद्र का पक्ष और परियोजना का उद्देश्य
केंद्र सरकार ने हाल ही में कहा था कि मेकेदातु जलाशय के निर्माण के लिए कर्नाटक को अन्य नदी तटीय राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है. कर्नाटक सरकार की योजना कनकपुरा तालुक के मेकेदातु क्षेत्र में एक बैलेंसिंग जलाशय बनाने की है. सरकार का कहना है कि तमिलनाडु को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के संशोधित आदेश के अनुसार निर्धारित पानी छोड़ने के बाद अतिरिक्त जल का भंडारण किया जाएगा. इसके साथ ही कनकपुरा और रामनगरा क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को भी पूरा करने का लक्ष्य है.
तमिलनाडु लगातार जता रहा है विरोध
हालांकि, इस परियोजना का तमिलनाडु लगातार विरोध करता रहा है. राज्य सरकार का कहना है कि मेकेदातु जलाशय बनने से निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और कावेरी नदी के जल बंटवारे पर असर पड़ सकता है. इसी कारण यह परियोजना लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय बनी हुई है. अब कर्नाटक सरकार इसे आगे बढ़ाने के पक्ष में खुलकर सामने आई है, जबकि अंतिम निर्णय और आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है.