Valmiki Scam: 89 करोड़ के मामले में कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र का इस्तीफा, कैमरे के सामने छलके आंसू

कर्नाटक के मंत्री बी नागेंद्र ने कथित वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर बढ़ते दबाव के बीच इस्तीफा दे दिया. उन्होंने खुद को साजिश का शिकार बताया और कहा कि जांच एजेंसियों से उन्हें डराया नहीं जा सकता.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ने के बीच योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. उनका नाम महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित 89 करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर विवाद में आया था. खास बात यह है कि नागेंद्र ने 3 अगस्त को ही दोबारा मंत्री पद संभाला था. इस्तीफे की घोषणा करते समय वह भावुक हो गए और कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को असहज स्थिति से बचाने के लिए यह कदम उठाया.

बी नागेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया. वह 3 अगस्त को मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल हुए थे और उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी मिली थी. यानी पुनर्नियुक्ति के केवल 25 दिन बाद उन्हें फिर पद छोड़ना पड़ा. नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने भारी मन से स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है. इससे पहले जून 2024 में भी वाल्मीकि निगम विवाद सामने आने के बाद वह मंत्री पद से हटे थे.

बीजेपी पर साजिश का आरोप

इस्तीफा देते समय नागेंद्र ने विपक्षी बीजेपी पर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए उन्हें डराया नहीं जा सकता. नागेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर मनुवादी ताकतें नहीं चाहतीं कि देश में कोई आदिवासी व्यक्ति आगे बढ़े. उन्होंने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि उसे उन्हें बल्लारी की जनता की अदालत में हराना चाहिए. जरूरत पड़ने पर उन्होंने विधायक पद छोड़कर चुनाव लड़ने की बात भी कही.


दोबारा मंत्री बनाए जाने पर बढ़ा दबाव

नागेंद्र की दोबारा मंत्रिमंडल में वापसी के बाद बीजेपी और जेडीएस ने कांग्रेस सरकार पर हमला तेज कर दिया था. दोनों दलों ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विधानसभा के मानसून सत्र में भी विरोध किया. लगातार हंगामे के कारण सत्र तीन दिन पहले ही समाप्त हो गया और 24 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया. विपक्ष ने 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने की भी घोषणा की थी.

कैसे सामने आया था वाल्मीकि निगम मामला?

यह विवाद मई 2024 में सामने आया, जब निगम के लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी. उनके पीछे छोड़े गए छह पन्नों के नोट में निगम के धन में कथित अनियमितताओं और अनधिकृत हस्तांतरण का जिक्र था. बाद की जांच में सामने आया कि निगम के खाते से 89.63 करोड़ रुपए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में भेजे गए थे. इसके बाद यह रकम कई अन्य खातों में स्थानांतरित की गई, जिससे मामला बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया.

इस्तीफे के बावजूद विवाद थमा नहीं

जब मामला पहली बार सामने आया था, तब नागेंद्र आदिवासी कल्याण मंत्री थे और उन्होंने जून 2024 में इस्तीफा दिया था. उन्होंने उस समय अपने खिलाफ लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया था. दो दिन पहले तक उन्होंने इस्तीफे की खबरों को खारिज किया था. लेकिन शुक्रवार को बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उन्होंने पद छोड़ दिया. अब उनकी दूसरी बार हुई विदाई ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के सामने इस पुराने विवाद को फिर केंद्र में ला दिया है.