'मैं पद छोड़ता हूं...', कर्नाटक CM सिद्धारमैया ने किया इस्तीफे का ऐलान; डीके शिवकुमार के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग में घोषणा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपना फैसला सुना दिया है. बीते कुछ दिनों से चल रहे अटकलों के बीच आज गुरुवार को इस्तीफे का ऐलान कर दिया है.

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Reepu Kumari

बेंगलुरु: कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने गुरुवार सुबह पुष्टि की कि वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे. उनका कहना है कि इससे उनके उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ तीन साल से चल रहे नेतृत्व विवाद का अंत हो जाएगा. दोनों के बीच का विवाद काफी चर्चाओं में रहा है. इतना ही नहीं कई बार पार्टी की सरकार को हाशिए पर धकेल दिया और यहां तक ​​कि उसे पटरी से उतारने की धमकी भी दी. यह घोषणा उनके बेंगलुरु स्थित आवास पर आयोजित एक नाश्ते की बैठक में की गई.

48 घंटे तक गुप्त बैठकें

इससे पहले दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ 48 घंटे तक गुप्त बैठकें और हड़बड़ी में विचार-विमर्श हुआ, जिसमें (अब) निवर्तमान मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने के लिए राजी करने के लिए एक हाई-प्रोफाइल मुआवजा पैकेज की पेशकश की गई थी - जिसमें राज्यसभा की एक सीट भी शामिल थी.

'मैं पद छोड़ता हूं'-सिद्धारमैया 

सिद्धारमैया के 'मैं पद छोड़ता हूं' संदेश की खबर का शिवकुमार के समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया, जिनमें से कई लोग जीत के नारे लगाते हुए और मिठाई बांटते हुए उनके आवास के बाहर जमा हो गए.

नाश्ते की बैठक - जिसमें मसाला डोसा, इडली, सांभर, चटनी, केसरीबाथ और अन्य कन्नड़ व्यंजन शामिल थे - एक आलिंगन और सम्मान के भाव के साथ शुरू हुई.

तीखी नोकझोंक

सिद्धारमैया और डीकेएस के बीच गले मिलना और डीकेएस का झुककर सिद्धारमैया के पैर छूना - सम्मान का एक संकेत - उन लोगों की नजरों से नहीं छूटा जिन्होंने इस कभी-कभी तीखी नोकझोंक को करीब से देखा है.

2023 से बढ़ी खटास

नवंबर 2025 में यह हलचल तब और तेज हो गई जब डीकेएस के समर्थकों ने कांग्रेस पर 2023 के चुनाव में जीत के बाद हुए सत्ता-साझाकरण समझौते का सम्मान करने के लिए दबाव डाला, जिसके बाद सिद्धारमैया और उनके आदमी के बीच 'मैं मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं' को लेकर टकराव शुरू हो गया.

इस समझौते को, जिसे न तो किसी भी दावेदार और न ही किसी पार्टी ने कभी स्वीकार किया है, में कहा गया था कि अनुभवी सिद्धारमैया पहले ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे.

शुरु में पद छोड़ने को तैयार नहीं थे सिद्धारमैया

इन सबके बाद भी उस समझौते को लागू करना एक चुनौती साबित हुआ है, क्योंकि सिद्धारमैया शुरू में पद छोड़ने को तैयार नहीं थे. हालांकि, अब ऐसा लगता है कि उन्हें पार्टी की विचारधारा का पालन करने के लिए मना लिया गया है, खासकर 2028 में होने वाले राज्य चुनाव और उसके अगले वर्ष होने वाले संघीय चुनाव को देखते हुए.