मोबाइल की टॉर्च के सहारे चलीं बसें? कर्नाटक की परिवहन व्यवस्था पर छिड़ा सियासी संग्राम
कर्नाटक में सरकारी बस सेवाओं की बदहाल स्थिति को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ बसों को कथित तौर पर मोबाइल की टॉर्च के सहारे चलते हुए दिखाया गया है. विपक्ष ने इसे परिवहन व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक बताया है.
कर्नाटक में सरकारी बस सेवाओं की स्थिति को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और तस्वीरों में दावा किया गया है कि कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम की कुछ बसें खराब हेडलाइट के बावजूद रात के समय मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में संचालित की गईं.
इन दावों ने राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विपक्ष का कहना है कि यदि बसों की बुनियादी मरम्मत तक समय पर नहीं हो पा रही है तो यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ समझौता है.
फंड की कमी को लेकर उठे सवाल
वायरल दावों के साथ यह भी कहा जा रहा है कि परिवहन निगम के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं, जिसके कारण बसों की हेडलाइट जैसी आवश्यक मरम्मत भी समय पर नहीं हो पा रही है. इसी आधार पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था वित्तीय संकट से जूझ रही है. इसका असर सीधे यात्रियों पर पड़ रहा है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है.
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एचडी कुमारास्वामी ने सरकार पर साधा निशाना
इस विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारास्वामी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा कर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कर्नाटक के लिए 4,500 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की थीं. उनके मुताबिक, दिसंबर 2025 में परियोजना को मंजूरी मिलने के बावजूद राज्य सरकार अब तक लेटर ऑफ अवार्ड जारी नहीं कर सकी है.
उनका दावा है कि इस कारण पूरी खरीद प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है और राज्य को आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का लाभ नहीं मिल पा रहा. बसों की कथित बदहाल स्थिति और इलेक्ट्रिक बस परियोजना में देरी को लेकर कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है. विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार पर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ता जा रहा है.