नाले के पानी से मिड डे मील की प्लेटें धो रहे बच्चे, वायरल फोटो ने खोली सरकारी स्कूलों की सच्चाई

कर्नाटक के बागलकोट जिले के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल से सामने आई तस्वीर ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है. फोटो में छोटे बच्चे खुले नाले के पास मिड डे मील की प्लेटें धोते नजर आ रहे हैं. इस घटना ने स्कूलों में साफ सफाई और बुनियादी सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है.

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Babli Rautela

बेंगलुरु: कर्नाटक के बागलकोट जिले के जमखंडी तालुक के अलाबल गांव स्थित एक सरकारी प्राइमरी स्कूल की तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. इस फोटो में बच्चे खुले नाले के पास पाइप के पानी से मिड डे मील की प्लेटें धोते दिखाई दे रहे हैं. तस्वीर सामने आते ही लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों देखने को मिली. वायरल फोटो में साफ देखा जा सकता है कि बच्चे गंदगी और नाले के बेहद करीब खड़े हैं. आम नागरिकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति बच्चों को संक्रमण और गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकती है. मिड डे मील योजना का मकसद बच्चों को पोषण देना है, लेकिन ऐसी लापरवाही उस उद्देश्य पर ही सवाल खड़े करती है.

सरकार की ओर से बार बार यह कहा जाता है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बेहतर की जा रही हैं. लेकिन बागलकोट की यह घटना ग्रामीण इलाकों की कड़वी सच्चाई सामने लाती है. यहां आज भी कई स्कूलों में पीने का साफ पानी और हाथ धोने जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं.

शिक्षा विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

इस घटना ने शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल प्रशासन को पहले ही ऐसी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए था. बच्चों से साफ सफाई की उम्मीद तब ही की जा सकती है, जब उनके लिए सुरक्षित और स्वच्छ व्यवस्था मौजूद हो.

फोटो वायरल होने के बाद जमखंडी क्षेत्र के बीईओ अशोक के बसान ने कहा कि स्कूल के हेडमास्टर की लापरवाही सामने आई है. उन्होंने बताया कि खुले नाले की समस्या को ठीक करने के लिए ग्राम पंचायत को पहले ही पत्र लिखा गया है. इसके साथ ही इस मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है.

बाल अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

इस गंभीर मामले पर कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लिया है. आयोग ने घटना को बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए शिकायत दर्ज की है. आयोग की ओर से जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है.

घटना के सामने आने के बाद बच्चों के माता पिता और स्थानीय नागरिकों ने स्कूल डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग कमेटी पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि जब स्कूल में सही इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है, तो बच्चों से स्वच्छता बनाए रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

सोशल मीडिया से सामने आई सच्चाई

यह मामला तब उजागर हुआ जब शिवलिंग निंगानूर नामक व्यक्ति ने यह तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की. इसके बाद देखते ही देखते फोटो वायरल हो गई. सैकड़ों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी और स्कूल प्रशासन तथा सरकार की आलोचना की.

वायरल फोटो पर आए कमेंट्स में कई लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. लोगों का कहना है कि गंदे नाले के पास खड़े बच्चों को संक्रमण का खतरा रहता है. कई नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में सिर्फ बयान नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई होनी चाहिए.