बेंगलुरु में गाड़ी पार्किंग पर 80 रुपये प्रति घंटे तक लगेगा चार्ज, घर के बाहर पार्किंग के लिए भी देने होंगे 25 हजार

बेंगलुरु में पार्किंग अब जेब पर भारी पड़ सकती है. प्रस्तावित नियमों में घर के बाहर पार्किंग परमिट 25 हजार रुपये सालाना और सड़क पर कार पार्क करने का शुल्क 80 रुपये प्रति घंटा रखा गया है.

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Kuldeep Sharma

कर्नाटक सरकार ने ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र के लिए पार्किंग नियमों का मसौदा जारी किया है. इसमें आवासीय पार्किंग से लेकर सड़क किनारे और ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग तक के शुल्क बदलने का प्रस्ताव है. सरकार का मकसद सड़कों पर लंबे समय तक वाहन खड़े करने की प्रवृत्ति घटाना और व्यवस्थित पार्किंग को बढ़ावा देना है.

कार पार्किंग के लिए सालाना 25 हजार तक शुल्क

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, घर के बाहर वाहन खड़ा करने के लिए सालाना परमिट लेना पड़ सकता है. छोटी कारों के लिए यह शुल्क 15 हजार रुपये, सेडान के लिए 20 हजार रुपये और एसयूवी के लिए 25 हजार रुपये प्रस्तावित किया गया है. इससे उन लोगों पर अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है जिनके घरों में पर्याप्त निजी पार्किंग की सुविधा नहीं है. सरकार ने इन नियमों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया है और जनता से सुझाव मांगे गए हैं.

सड़क पर पार्किंग के लिए 80 रुपये प्रति घंटा

व्यावसायिक और अन्य गैर-आवासीय इलाकों में सड़क किनारे पार्किंग की दर सड़क की श्रेणी के आधार पर तय करने का प्रस्ताव है. कारों के लिए श्रेणी सी सड़कों पर 40 रुपये, श्रेणी बी पर 60 रुपये और श्रेणी ए सड़कों पर 80 रुपये प्रति घंटे का शुल्क हो सकता है. दोपहिया वाहनों के लिए यही दरें क्रमशः 20, 30 और 40 रुपये रखी गई हैं. यानी प्रमुख सड़कों पर पार्किंग काफी महंगी हो सकती है.


ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग होगी अपेक्षाकृत सस्ती

सरकार वाहन चालकों को सड़क की बजाय निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है. प्रस्ताव में कारों के लिए ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग का शुल्क 20 से 40 रुपये प्रति घंटा और दोपहिया वाहनों के लिए 10 से 20 रुपये रखा गया है. मासिक शुल्क 1,000 से 4,000 रुपये के बीच हो सकता है. रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक पार्किंग करने वालों को मासिक शुल्क में 50 प्रतिशत छूट देने का भी प्रस्ताव है.

लंबे समय तक पार्किंग पर बढ़ेगा खर्च

मसौदा नियमों का एक प्रमुख उद्देश्य सार्वजनिक सड़कों पर लंबे समय तक वाहनों के कब्जे को रोकना है. दो घंटे से ज्यादा समय तक सड़क किनारे वाहन खड़ा करने पर शुल्क धीरे-धीरे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है. कर्नाटक के शहरी विकास विभाग ने 11 अगस्त को राजपत्र में मसौदा प्रकाशित किया है. जनता को 30 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव देने का मौका दिया गया है. इसके बाद सरकार नियमों को अंतिम रूप देगी.