झारखंड के गांवों की बदलेगी तस्वीर, पंचायतों को विकास के लिए मिलेंगे 14,231 करोड़ रुपये
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत झारखंड की 4,345 पंचायतों को 2026-27 से 2030-31 के बीच 14,231 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा. चलिए जानते हैं इससे किन-किन क्षेत्रों में विकास होगा.
रांची: झारखंड की ग्राम पंचायतों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत राज्य की 4,345 पंचायतों को वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच कुल 14,231 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा. इस राशि का उपयोग ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनसेवाओं को मजबूत करने के लिए किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे गांवों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और पंचायतों को अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा.
मिली जानकारी के अनुसार कुल अनुदान में 11,385 करोड़ रुपये बेसिक ग्रांट और 2,846 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में दिए जाएंगे. नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने 16वें वित्त आयोग से अनुरोध किया कि यह राशि समय पर जारी की जाए. उन्होंने कहा कि अनुदान में देरी होने से पंचायतों की विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं. साथ ही उन्होंने परफॉर्मेंस ग्रांट जारी करने में भी उदारता बरतने की अपील की.
कार्यशाला में कौन-कौन था मौजूद?
कार्यशाला में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल भी मौजूद रहे. मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों तक सरकारी सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी.
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उन्होंने आगे क्या कहा?
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व वित्त आयोगों की अप्रयुक्त राशि के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं हैं. ऐसी स्थिति में नई अनुदान राशि प्राप्त करने में दिक्कत आ सकती है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की. इसके अलावा पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को मिलने वाली सहायता राशि को भी आगे जारी रखने का अनुरोध किया, क्योंकि यही कर्मचारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
मंत्री ने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों में पंचायतों की अपनी राजस्व जुटाने की क्षमता अभी सीमित है. इसलिए प्रदर्शन आधारित अनुदान तय करते समय राज्यों की परिस्थितियों और संसाधनों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए. उन्होंने यह भी मांग की कि 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को मिलने वाले 750 करोड़ रुपये के बकाया अनुदान का जल्द भुगतान किया जाए.
कहां-कहां होगा खर्च?
16वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण और जल पुनर्चक्रण जैसी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा. शेष 40 प्रतिशत राशि सड़क, नाली, पुलिया, पंचायत भवन और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण एवं विकास कार्यों में उपयोग की जाएगी.