'सरकार के दरवाजे सभी के लिए खुले', झारखंड में छात्र आंदोलन के 12वें दिन बोले हेमंत सोरेन

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बातचीत का भरोसा दिया है. सरकार उच्च स्तरीय समिति बनाने और आरोपों की जांच में सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है.

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Kanhaiya Kumar Jha

रांची: झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आंदोलन कर रहे छात्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनकी हर बात सुनने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और समाधान निकालने का पूरा प्रयास होगा.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और जो भी अपनी बात रखना चाहता है, वह सीधे सरकार के सामने अपनी मांग रख सकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाएगा और उचित निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा.

जांच और कार्रवाई का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. उनके मुताबिक जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं. कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि कई स्थानों पर छापेमारी भी जारी है. उन्होंने कहा कि अब तक की कार्रवाई से उम्मीद है कि मामले का ठोस समाधान सामने आएगा. जरूरत पड़ने पर इस विषय पर केंद्रीय गृह मंत्री से भी चर्चा की जा सकती है.


सरकार बनाएगी उच्च स्तरीय समिति

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का समर्थन किया है. पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि सरकार अगले एक या दो दिनों में एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर सकती है. यह समिति छात्रों की मांगों की समीक्षा करेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश करेगी. उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं.

ऐसे शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन

विवाद की शुरुआत 5 जुलाई को 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद हुई. कई अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग की. इसके बाद से छात्र लगातार धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है कि भर्ती प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.

अनशन जारी, बदला विरोध का तरीका

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने बुधवार को कहा कि वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे, लेकिन अब पूर्ण उपवास के बजाय केवल भोजन का त्याग करेंगे और पानी पीते रहेंगे. यह फैसला सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील के बाद लिया गया. वांगचुक ने छात्रों के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताते हुए महतो से स्वास्थ्य का ध्यान रखने की अपील की थी. महतो ने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा.