झारखंड के सारंडा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में कोबरा के पांच जवान घायल, तलाशी अभियान जारी

झारखंड पुलिस के आईजी ऑपरेशंस और प्रवक्ता माइकलराज एस ने कहा कि मुठभेड़ में रुक-रुककर गोलीबारी हो रही थी, जो अब बंद हो चुकी है. हालांकि जंगल में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है. सुरक्षा बल नक्सलियों की तलाश में जुटे हुए हैं. यह घटना बुधवार को हुई जब कोबरा के जवान क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन पर निकले थे.

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रांची: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में बुधवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच तीव्र मुठभेड़ हुई. इस एनकाउंटर में कोबरा बटालियन के पांच जवान घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि सभी घायल जवान खतरे से बाहर हैं और उनका इलाज चल रहा है. 

नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में कोबरा के 5 जवान घायल

झारखंड पुलिस के आईजी ऑपरेशंस और प्रवक्ता माइकलराज एस ने कहा कि मुठभेड़ में रुक-रुककर गोलीबारी हो रही थी, जो अब बंद हो चुकी है. हालांकि जंगल में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है. सुरक्षा बल नक्सलियों की तलाश में जुटे हुए हैं. यह घटना बुधवार को हुई जब कोबरा के जवान क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन पर निकले थे.

तलाशी अभियान जारी

सारंडा जंगल लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है. घायल जवानों को तुरंत चिकित्सा सहायता दी गई. उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है. सुरक्षा बलों ने सतर्कता के साथ जवाबी कार्रवाई की, जिससे स्थिति पर काबू पाया जा सका. इस मुठभेड़ में नक्सलियों के हताहत होने की भी खबरें हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. इसी दिन केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की. 

गृह मंत्रालय ने 8 अप्रैल को नौ राज्यों को पत्र लिखकर बताया कि देश में अब कोई भी जिला नक्सल हिंसा प्रभावित नहीं रह गया है. मार्च 2026 के अंत में की गई उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया. यह समीक्षा 2015 में बनी 'नेशनल पॉलिसी एंड एक्शन प्लान टू एड्रेस लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म' के तहत की गई थी. गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च को कहा था कि भारत अब माओवादियों से मुक्त हो चुका है. 

उन्होंने बताया कि 2014 में 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, जो अब शून्य रह गए हैं. केंद्र सरकार का दावा है कि पिछले कई वर्षों में सुरक्षा बलों के निरंतर अभियानों, विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के सहयोग से लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) की समस्या लगभग खत्म हो गई है. हजारों नक्सली मारे गए, गिरफ्तार हुए या सरेंडर कर चुके हैं. फिर भी सरंडा जैसे कुछ इलाकों में कभी-कभी छोटी घटनाएं होती रहती हैं. 

विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह शांति के लिए सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी विकास योजनाओं को तेजी से लागू करना जरूरी है. झारखंड पुलिस और केंद्र सरकार दोनों इस घटना पर नजर रखे हुए हैं. सर्च ऑपरेशन में और नक्सलियों के पकड़े जाने की संभावना है. इस घटना ने सुरक्षा बलों की बहादुरी को एक बार फिर साबित किया है.