सूरजकुंड हादसे के बाद भी दिखी मेले में रौनक, अफसरों की लापरवाही पर उठ रहे सवाल; जानें झूला लगाने को लेकर क्या हैं नियम
सूरजकुंड मेले में हुए हादसे के बाद, मनोरंजन राइड्स लगाने के नियमों और जांच प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए गए हैं. इस घटना की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT बनाई गई है.
फरीदाबाद: सूरजकुंड मेले में हुए हादसे के बाद भी रविवार को भीड़ कम नहीं हुई. हादसे के बाद प्रशासन ने झूला वाला इलाका पूरी तरह बंद कर दिया था, लेकिन मेले की रौनक में कोई कमी नहीं आई. लोग ऐसे आते-जाते रहे जैसे कुछ हुआ ही न हो. परिवार, बच्चे और टूरिस्ट मस्ती करते दिखे. लोगों ने सुरक्षा का ध्यान रखते हुए मेले का आनंद लिया.
झूला लगाने से पहले साइट, निकलने और अंदर आने के पॉइंट्स का निरीक्षण किया जाता है. झूले की मजबूती और टेक्निकल निरीक्षण के लिए मैकेनिकल इंजीनियर या संबंधित सरकारी एजेंसी से फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी होता है. फायर डिपार्टमेंट से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी जरूरी होता है.
और क्या - क्या है नियम?
यह भी नियम है कि बिजली के कनेक्शन और वायरिंग का निरीक्षण एक इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर द्वारा किया जाना चाहिए. मेले में आने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एम्यूजमेंट राइड के मालिक के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है. किसी भी दुर्घटना की स्थिति में, ऑपरेटर मुआवजे के लिए जिम्मेदार होता है.
हर राइड के बाहर एक बोर्ड पर ऊंचाई की पाबंदी, उम्र की सीमा और सुरक्षा निर्देश हिंदी और अंग्रेजी में साफ-साफ लिखे होने चाहिए. झूला वाले इलाके में फर्स्ट-एड किट और इमरजेंसी स्टॉप बटन अनिवार्य है.
झूले लगाने से पहले जांच कमेटी में कौन-कौन होता है शामिल?
जांच कमेटी में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, जेसी बोस YMCA यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के चेयरमैन, एक फायर ऑफिसर, HSVP के SDO इलेक्ट्रिकल, हरियाणा स्टेट ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के मैकेनिकल इंचार्ज, हरियाणा टूरिज्म के एक जूनियर इंजीनियर और इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टरेट के एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर शामिल थे.
इस मामले की जांच के लिए क्या लिया गया एक्शन?
पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है. टीम में एसीपी क्राइम वरुण कुमार दहिया, क्राइम ब्रांच इंचार्ज शीशपाल और सूरजकुंड पुलिस स्टेशन के एसआइ संजय शामिल हैं. डीसीपी मुकेश मल्होत्रा इस टीम की देखरेख करेंगे. टीम वैज्ञानिक पहलुओं के आधार पर मामले की जांच कर रही है. जिससे आने वाले समय में इस तरह के हादसों पर रोक लगाई जा सके.
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