अफसरों की गाड़ी गंदी हुई तो लगेगा 200 का जुर्माना... हरियाणा सरकार के टेंडर में अनोखी शर्तें, यहां जानें सब कुछ?
हरियाणा सरकार के सिविल एविएशन विभाग ने अधिकारियों की आवाजाही के लिए वाहनों की हायरिंग का टेंडर जारी किया है. इसमें गाड़ी की सफाई से लेकर ड्राइवर के व्यवहार तक सख्त नियम तय किए गए हैं.
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने अधिकारियों की आवाजाही के लिए नया टेंडर जारी किया है जिसमें सख्त नियम लागू किए हैं. यह टेंडर हरियाणा सिविल एविएशन विभाग की ओर से निकाला गया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अधिकारियों को सुरक्षित समय पर और साफ सुथरे वाहनों में यात्रा की सुविधा मिले. इस टेंडर के जरिए करीब 15 वाहनों को आउटसोर्स किया जाएगा, जो चंडीगढ़ मुख्यालय हिसार एयरपोर्ट और अन्य स्थानों पर सेवाएं देंगे.
यह टेंडर 3 साल के लिए होगा. इसे रेट कॉन्ट्रैक्ट के रूप में लागू किया जाएगा. इसमें हर साल दरों में अधिकतम 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है. हालांकि विभाग के पास यह अधिकार भी रहेगा कि वह 1 महीने का नोटिस देकर बिना कारण बताए कॉन्ट्रैक्ट खप्त कर सके. इस शर्त ने टैक्सी एजेंसियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
कम से कम दस वाहन जरूरी
टेंडर की एक अहम शर्त यह रखी गई है कि ठेकेदार के पास कम से कम 10 कमर्शियल वाहन खुद के नाम पर होने चाहिए. किराए या किसी दूसरे के नाम पर दर्ज वाहन मान्य नहीं होंगे. इससे साफ है कि विभाग केवल गंभीर और सक्षम एजेंसियों को ही मौका देना चाहता है.
हर वाहन 5 साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही गाड़ी ढाई लाख किलोमीटर से ज्यादा चली हुई नहीं होनी चाहिए. अगर कॉन्ट्रैक्ट के दौरान कोई वाहन इस सीमा को पार करता है तो उसे तुरंत बदलना अनिवार्य होगा. ऐसा न करने पर प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा.
गाड़ी गंदी मिली तो सीधा जुर्माना
सफाई को लेकर विभाग ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. अगर किसी दिन वाहन गंदा मिला या सीट कवर से बदबू आई तो पहले दिन 50 रुपये का जुर्माना लगेगा. यदि यह गलती लगातार दूसरे दिन भी पाई गई तो प्रतिदिन 200 रुपये की पेनल्टी वसूली जाएगी. इससे साफ है कि सफाई में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
अगर तय समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया तो 100 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा. अधिकारियों की समय की कीमत को देखते हुए यह शर्त काफी अहम मानी जा रही है. विभाग का मानना है कि इससे ऑपरेटर समय की पाबंदी को गंभीरता से लेंगे.
खराब गाड़ी एक घंटे में बदलनी होगी
ड्यूटी के दौरान अगर वाहन खराब हो जाता है तो ठेकेदार को एक घंटे के भीतर वैकल्पिक गाड़ी उपलब्ध करानी होगी. यदि ऐसा नहीं किया गया तो विभाग खुद वाहन की व्यवस्था करेगा. इसका पूरा खर्च ठेकेदार से वसूला जाएगा और इसके साथ पांच सौ रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगेगा.
ड्राइवर के दुर्व्यवहार को लेकर भी साफ दिशा निर्देश दिए गए हैं. किसी भी शिकायत पर 500 रुपये प्रति शिकायत जुर्माना लगेगा. यदि इसके बाद भी ड्राइवर नहीं बदला गया तो वाहन वापस कर दिया जाएगा. बाहर से टैक्सी मंगवाने का खर्च भी ठेकेदार को उठाना होगा.
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