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महाशिवरात्रि पर भक्ति का अनोखा रूप, हरियाणा की ज्योति बनीं ‘इन्दुलेखा’, बांके बिहारी को पति मानकर मनाई विवाह की पहली वर्षगांठ

महाशिवरात्रि पर भगवान की अराधना और पूजा का अनोखा रूप देखने को मिला. एक तरफ लोग भक्ती के मार्ग से प्रतिदिन दूर जा रहे हैं, वहीं हरियाणा की रहने वाली ज्योति ने तन-मन-धन से श्री बांके बिहारी को अपना लिया.

Reporter
Ashutosh Rai

हरियाणाः महाशिवरात्रि पर भगवान की अराधना और पूजा का अनोखा रूप देखने को मिला. एक तरफ लोग भक्ती के मार्ग से प्रतिदिन दूर जा रहे हैं, वहीं हरियाणा की रहने वाली ज्योति ने तन-मन-धन से श्री बांके बिहारी को अपना लिया. इन्दुलेखा ने रविवार को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बांके बिहारी जी को अपना पति मानकर विवाह रचाया था. आज उसी अनोखे विवाह की पहली वर्षगांठ पर दुल्हन के श्रृंगार में सुसज्जित होकर विशेष पूजा-अर्चना की. उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप श्री बांके बिहारी जी के साथ विवाह की पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाई.

हरियाणा की रहने वाली ज्योति को अब लोग इन्दुलेखा के नाम से जानते हैं. उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप श्री बांके बिहारी जी के साथ विवाह की पहली वर्षगांठ धूमधाम से मनाई. इन्दुलेखा ने रविवार को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बांके बिहारी जी को अपना पति मानकर विवाह रचाया था. आज उसी अनोखे विवाह की पहली वर्षगांठ पर उन्होंने दुल्हन के श्रृंगार में सुसज्जित होकर विशेष पूजा-अर्चना की.

पति से तलाक के बाद भगवान को समर्पित

बताया जाता है कि इन्दुलेखा ने अपने सांसारिक पति से तलाक लेने के बाद स्वयं को पूरी तरह भगवान की भक्ति में समर्पित कर दिया. धीरे-धीरे उनकी श्रद्धा और आस्था इतनी गहरी हो गई कि उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को ही अपना सर्वस्व मान लिया. इसके बाद उन्होंने विधिवत पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार के बीच भगवान बांके बिहारी जी के साथ विवाह संस्कार संपन्न किया.

पारंपरिक दुल्हन की तरह किया सोलह श्रृंगार

वर्षगांठ के अवसर पर इन्दुलेखा ने पारंपरिक दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार किए. हाथों में मेहंदी रचाई, लाल जोड़ा पहना और वैवाहिक प्रतीकों से स्वयं को सजाया. उन्होंने अपने समीप पति के रूप में श्री बांके बिहारी जी की प्रतिमा स्थापित कर आरती, भजन और प्रसाद वितरण किया. इस दौरान उनके साथ कुछ श्रद्धालु भी मौजूद रहे, जिन्होंने भक्ति गीतों के माध्यम से माहौल को भक्तिमय बना दिया.

सांसारिक जंजाल से भगवान ने निकाला

इन्दुलेखा का कहना है, “भगवान ने मुझे सांसारिक जंजाल से निकालकर अपने प्रेम में रमाया है. अब मेरा जीवन पूरी तरह उनकी भक्ति को समर्पित है. मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे उनके चरणों में स्थान मिला.” उन्होंने आगे कहा कि यह वर्ष उनके लिए आध्यात्मिक शांति और संतोष से भरा रहा.

भक्ति और विवाह बना चर्चा का विषय

उनकी यह अनोखी भक्ति और विवाह की परंपरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. जहां कुछ लोग इसे अटूट श्रद्धा का उदाहरण मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था का निर्णय बता रहे हैं. फिलहाल इन्दुलेखा अपने इस आध्यात्मिक जीवन से संतुष्ट नजर आ रही हैं और भगवान बांके बिहारी जी की सेवा-भक्ति में लीन हैं.