नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में मौसम में बदलाव को लेकर मौसम विभाग ने जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसके मुताबिक आने वाले कुछ दिन लोगों को बेहद सर्द रातों का एहसास कराने वाले हैं. मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ का असर यहां देखने को मिलेगा, जिससे 1 फरवरी से तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को भयंकर शीतलहर का सामना करना पड़ सकता है. हाल ही में जिस तरह से यहां के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली थी, उससे ये अनुमान लगाया जा रहा था कि दिल्ली-एनसीआर में सर्दी के सितम पर अब ब्रेक लग गया है, लेकिन मौसम विभाग के हालिया पूर्वानुमान से फिलहाल सर्द रातों के प्रकोप से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है.
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर अब दिल्ली की हवाओं में साफ महसूस होने लगा है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 1 फरवरी को दिल्ली-एनसीआर में केवल बारिश ही नहीं, बल्कि गरज-चमक के साथ तेज सतही हवाएं और सर्द मौसम का 'ट्रिपल अटैक' होगा. सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा छाए रहने की पूरी उम्मीद है, जबकि शाम होते-होते बिजली कड़कने के साथ हल्की बारिश और तूफान लोगों को घरों के भीतर रहने पर मजबूर कर देंगे.
आगामी दिनों में दिल्ली का अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम पारा गिरकर 12 डिग्री तक जा सकता है. यह सर्द हवाएं मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ाएंगी, जिससे रात और सुबह के समय ठंड का अहसास बहुत ज्यादा होगा. मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के वातावरण को पूरी तरह ठंडा कर देंगी.
मौसम के इस बड़े बदलाव के बीच वायु गुणवत्ता (AQI) की स्थिति फिलहाल कोई राहत नहीं दे रही है. दिल्ली के विवेक विहार में एक्यूआई 344 और वजीरपुर में 332 दर्ज किया गया है, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है. आनंद विहार, आरके पुरम और रोहिणी जैसे इलाके भी रेड जोन में बने हुए हैं. नोएडा के सेक्टर-125 और सेक्टर-116 में भी प्रदूषण का स्तर काफी अधिक है, जिससे सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं चिंता का विषय बनी हुई हैं.
पर्यावरण विशेषज्ञों और मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 1 फरवरी को होने वाली बारिश प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली के लिए वरदान साबित हो सकती है. तेज हवाओं और बारिश के कारण वायुमंडल में जमे प्रदूषित सूक्ष्म कण जमीन पर बैठ जाएंगे, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार होने की पूरी संभावना है. हालांकि, जब तक बारिश नहीं होती, तब तक लोगों को इस जहरीली हवा से सतर्क रहना होगा.
मौसम विभाग ने साफ किया है कि यह उथल-पुथल आने वाले हफ्ते तक जारी रह सकती है. 31 जनवरी से 3 फरवरी के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होगी, जिसका असर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के मैदानी हिस्सों में दिखेगा. इसके बाद 5 से 7 फरवरी के बीच एक और सक्रिय मौसमी सिस्टम दस्तक दे सकता है, जिससे दोबारा बारिश और हाड़ कंपाने वाली ठंड बढ़ने के आसार हैं.