दिल्ली में मौत की दर बढ़ी, जन्म दर घटी, सरकार की इस रिपोर्ट ने उड़ाए राजधानी के होश

देश की राजधानी दिल्ली में रहने वालों के लिए एक डराने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार की ताज़ा वार्षिक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि शहर में मृत्यु दर बढ़ गई है.

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Ashutosh Rai

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में रहने वालों के लिए एक डराने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार की ताज़ा वार्षिक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि शहर में मृत्यु दर बढ़ गई है, जबकि जन्म दर में गिरावट आई है.

रिपोर्ट के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की जहरीली हवा और बदलती लाइफस्टाइल अब सीधे लोगों की जान पर बन आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि हृदय और फेफड़ों की बीमारियों का यह बढ़ता ग्राफ सीधे तौर पर बढ़ते वायु प्रदूषण और तनावपूर्ण शहरी जीवन से जुड़ा हुआ है.

मौत का सबसे बड़ा कारण

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में होने वाली कुल मौतों में 23 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ सर्कुलेटरी सिस्टम के फेल होने का है. इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली के हर 100 में से 23 लोग हृदय गति रुकने या रक्त प्रवाह बाधित होने के कारण दम तोड़ रहे हैं. 2024 में इस वजह से कुल 21,262 मौतें दर्ज की गई हैं. 2.18 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में हर दिन औसतन 381 मौतें होना एक गंभीर चिंता का विषय है.

प्रदूषण और संक्रमण: मौत के अन्य बड़े खिलाड़ी

दिल्ली की आबोहवा कितनी जहरीली हो चुकी है, इसका प्रमाण फेफड़ों की बीमारियों के आंकड़ों से मिलता है:

सांस की बीमारियां: 2024 में फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों से 9,211 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 8,801 था. दिल्ली की हवा अब साल दर साल और अधिक जानलेवा होती जा रही है.

संक्रमण का खतरा: लगभग 17 प्रतिशत मौतें (16,060) दूषित पानी, गंदा खाना और जीवाणु जन्य संक्रमण की वजह से हुईं, जो राजधानी की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगाता है.

बढ़ती मृत्यु दर

दिल्ली की मृत्यु दर 2023 के 6.16 फीसदी से बढ़कर अब 6.37 फीसदी हो गई है. इसके उलट, जन्म दर में गिरावट देखी गई है; यह 14.66 फीसदी से घटकर 14 फीसदी पर आ गई है.

जन्म का गणित: साल 2024 में कुल 3,06,459 बच्चों ने जन्म लिया, जिनमें 52.06% लड़के और 47.91% लड़कियां शामिल हैं.

शिक्षा और मातृत्व: रिपोर्ट में एक दिलचस्प ट्रेंड दिखा है कि स्नातक पास महिलाएं केवल 9.63% बच्चों को जन्म दे रही हैं, जबकि 10वीं पास महिलाओं में यह दर 41.12% के साथ सबसे अधिक है.