दिल्ली के मॉल, स्कूल और अस्पतालों में अचानक गूंजे सायरन, जानिए राजधानी में क्यों हुई ये 'मॉक ड्रिल'?

राजधानी दिल्ली से लेकर पाकिस्तान की सीमा से सटे कई राज्यों में बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया.

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Ashutosh Rai

नई दिल्ली: किसी भी दुश्मन के हमले, युद्ध जैसी आपात स्थिति या भयानक प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए भारत का नागरिक सुरक्षा तंत्र कितनी तेजी से काम करता है. इसे परखने के लिए देश भर में बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. राजधानी दिल्ली से लेकर पाकिस्तान की सीमा से सटे कई राज्यों में आयोजित इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास ने सरकार की मुस्तैदी और सुरक्षा तंत्र की मजबूती को रेखांकित किया है.

दिल्ली के VIP इलाकों, मॉल और अस्पतालों में चला अभियान

डायरेक्टरेट ऑफ सिविल डिफेंस द्वारा जारी बयान के अनुसार, दिल्ली में यह अभ्यास बेहद व्यापक स्तर पर हुआ। उत्तरी और पुरानी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले शॉपिंग मॉल्स, स्कूलों, अस्पतालों और जिला प्रशासन कार्यालयों में आपातकालीन बचाव के तरीके परखे गए.

नई दिल्ली में सुरक्षा के विशेष इंतजाम

नई दिल्ली में विदेशी मेहमानों और VIP लोगों की भारी आवाजाही रहती है, इसलिए यहां सुरक्षा के विशेष इंतजामों को चेक किया गया. सरदार पटेल मार्ग पर स्थित ताज पैलेस होटल और दिल्ली कैंट के 'कैंटोनमेंट जनरल अस्पताल' में विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर अभ्यास किया. इसका मुख्य उद्देश्य संकट के समय एजेंसियों के बीच सटीक तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक्शन में ऑपरेशन शील्ड

हाल ही में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद, सरकार ने नागरिक सुरक्षा की तैयारियों को धार देने के लिए ऑपरेशन शील्ड शुरू किया. इसके तहत उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर विशेष फोकस किया गया, जो पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करते हैं. इनमें पंजाब, राजस्थान, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और चंडीगढ़ के बेहद संवेदनशील जिले शामिल थे.

पूरा शहर ब्लैकआउट

सीमावर्ती इलाकों में हुए इस अभ्यास के दौरान वास्तविक युद्ध जैसी खौफनाक स्थितियां पैदा की गईं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, अभ्यास को जीवंत बनाने के लिए पंजाब के कई संवेदनशील नागरिक क्षेत्रों में पूरी तरह से ब्लैकआउट कर दिया गया था. हालांकि, अस्पतालों जैसी जरूरी आपातकालीन सेवाओं को इससे बाहर रखा गया था.

हवाई हमले के सायरन बजाए

अचानक हवाई हमले के सायरन बजाए गए, ताकि यह परखा जा सके कि भारी दबाव और डर के माहौल में स्थानीय प्रशासन, बचाव दल और आम जनता कितनी असरदार तरीके से काम करती है. यह अभियान पिछले साल गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद उभरी कमियों को सुधारने और देश को हर बाहरी खतरे के लिए 24x7 तैयार रखने का एक अहम हिस्सा है.