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कोर्ट रूम में हाई वोल्टेज ड्रामा, वकीलों ने जज को कह डाला नशेड़ी; गाली-गलौज तक पहुंचा मामला

दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान जज और वकीलों के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौच का मामला सामने आया है. बार काउंसिल ने बैठक कर न्यायिक अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: न्याय के मंदिर कहे जाने वाले कोर्ट रूम से एक बेहद हैरान करने वाली और मर्यादा को तार-तार करने वाली घटना सामने आई है. दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक जज और वकील के बीच जबरदस्त विवाद हो गया. यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच अपशब्दों का प्रयोग शुरू हो गया. बात हाथापाई के स्तर तक पहुंचने ही वाली थी कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और स्टाफ ने बीच-बचाव किया. इस घटना ने पूरी कानूनी बिरादरी को हिलाकर रख दिया है.

जानकारी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम जिला अदालत के कमरा नंबर 04 में सुनवाई चल रही थी. इसी दौरान जज राकेश कुमार और वहां मौजूद वकीलों के बीच किसी कानूनी बिंदु पर तीखी बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते शांत रहने वाला माहौल पूरी तरह बदल गया. इस गहमा-गहमी में बात इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि बहस गाली-गलौच तक पहुंच गई. गुस्से में एक वकील ने जज के आचरण पर गंभीर उंगली उठाते हुए उन्हें नशेड़ी तक कह डाला.


बार एसोसिएशन की आपात बैठक

इस अप्रत्याशित घटना के तुरंत बाद शनिवार को दिल्ली की सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने एक आपात बैठक बुलाई. इस बैठक में रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए. समिति ने एक कड़ा प्रस्ताव पारित कर न्यायिक अधिकारी के इस व्यवहार की तीखे शब्दों में निंदा की. वकीलों का कहना है कि ऐसा अशोभनीय आचरण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करता है.

अनुकरणीय कार्रवाई की पुरजोर मांग

समन्वय समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए दोषी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई है. वकीलों का साफ कहना है कि इस मामले में ऐसी दंडात्मक मिसाल कायम की जानी चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी ऐसा दुर्व्यवहार करने की हिम्मत न करे. उनके अनुसार, कोई भी ऐसा कृत्य जो न्यायपालिका की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता हो, उसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज या बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी गुहार

वकीलों की इस शीर्ष समिति ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से कुछ न्यायिक अधिकारियों के बर्ताव को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें अब गंभीरता से लिया जाना जरूरी है. चीफ जस्टिस से मांग की गई है कि वे कोर्ट परिसरों में सुधारात्मक और संस्थागत बदलाव सुनिश्चित करें, ताकि वकीलों और जजों के बीच आपसी सम्मान और सौहार्द का माहौल बना रहे.

वकीलों की एकजुटता का ऐलान

इस पूरे विवाद के बाद दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों के वकील एकजुट हो गए हैं. समन्वय समिति ने अपने आधिकारिक बयान में साफ कर दिया है कि पूरी कानूनी बिरादरी अपने सामूहिक सम्मान और पेशेवर गरिमा की रक्षा के लिए एक साथ खड़ी है. वकीलों का कहना है कि वे न्याय की प्रक्रिया में पूरा सहयोग करते हैं, लेकिन अपने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं करेंगे. अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च न्यायालय इस विवाद पर क्या कदम उठाता है.