Red Fort Blast Case: फर्जी नाम, घर में लैब और AI से बम बनाने की ट्रेनिंग; लाल किला ब्लास्ट केस में NIA के बड़े खुलासे
लाल किले में हुए भीषण विस्फोट मामले में एनआईए की जांच ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. मुख्य आरोपी ने फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन रसायन और विशेष उपकरण खरीदे थे.
नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले में हुए भयावह विस्फोट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच ने कई सनसनीखेज राज खोले हैं. एजेंसी के मुताबिक मुख्य आरोपी ने बेहद सुनियोजित तरीके से फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर विस्फोटक सामग्री जुटाई और घर में ही प्रयोगशाला तैयार कर ली थी. आतंकवाद विरोधी एजेंसी ने पाया है कि विस्फोटक से भरी कार चला रहे और विस्फोट में मारे गए डॉ. उमर उन नबी ने फर्जी नाम का इस्तेमाल करके रसायन और विशेष उपकरण खरीदे थे. पिछले साल 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी में हुए उच्च तीव्रता वाले वाहन-जनित विस्फोट में कम से कम 11 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए.
बम बनाने की तैयारी
उमर-उन-नबी ने ऑनलाइन AI से और ऑफलाइन दोनों स्रोतों से बम बनाने की जानकारी जुटाई और हरियाणा के फरीदाबाद में अल फलाह विश्वविद्यालय के पास स्थित अपने फ्लैट में एक अस्थायी प्रयोगशाला स्थापित की. एनआईए के अनुसार, उमर ने लंबे समय तक विभिन्न रसायनों और विस्फोटक बनाने की विधियों पर शोध किया था. उसने फ्लैट में एक प्रोटोटाइप विस्फोटक सामग्री तैयार करने के उद्देश्य से प्रयोग किए.
महत्वपूर्ण सबूत मिले
मुंबई के एक छोटे व्यापारी द्वारा 25 सितंबर, 2024 को जारी किए गए डिलीवरी चालान में सामग्रियों की आपूर्ति के बारे में महत्वपूर्ण सबूत मिले. इसमें मिश्रित धातु ऑक्साइड (एमएमओ) लेपित टाइटेनियम एनोड की खरीद दर्ज की गई थी, जो विद्युत अपघटन प्रक्रिया के लिए आवश्यक एक विशेष इलेक्ट्रोड है.
पूछताछ में कई खुलासे
आरोपी से पूछताछ में पता चला कि उमर के फ्लैट में साधारण नमक के घोल से क्लोरेट और परक्लोरेट बनाने के लिए विद्युत अपघटन किया गया था, यह तकनीक उसने अपने शोध के दौरान सीखी थी. क्लोरेट और परक्लोरेट ऐसे पदार्थ हैं जिनका उपयोग आमतौर पर आतिशबाजी और विस्फोटकों में किया जाता है.
फर्जी पहचान पत्र
हालांकि उमर एनोड का असली खरीदार था, लेकिन चालान में खरीदार का नाम और मोबाइल नंबर किसी और व्यक्ति का दर्ज था. एनआईए का कहना है कि उसने राहुल भट (जिसे राहुल भट्ट भी कहा जाता है) नाम से फर्जी पहचान बनाई और इंडियामार्ट प्लेटफॉर्म पर एक खाता खोला. इस नाम से उसने खाद की बोरियां, एसीटोन सॉल्वेंट, एनोड और रसायन जैसी वस्तुओं में रुचि दिखाई.
पैसों का लेन देन
अगस्त 2024 में, उमर ने मुंबई के एक दुकानदार से संपर्क किया और PhonePe डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 25,000 रुपये ट्रांसफर किए. दुकानदार ने कूरियर के माध्यम से सामान अल फलाह विश्वविद्यालय के ठीक बाहर एक पते पर भेजा, जहां उमर ने स्वयं जाकर सामान प्राप्त किया.
आतंकवाद से लिंक
उसी फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हुए, उमर ने बाद में दस अतिरिक्त एनोड खरीदने के लिए बातचीत की. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कथित आतंकवादी मॉड्यूल को नाकाम करने के कारण यह सौदा पूरा नहीं हो सका. एनआईए ने इस मॉड्यूल को अंसार गजवत-उल-हिंद (AGUH) से जोड़ा है, जो प्रतिबंधित संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से संबद्ध एक समूह है.
एक मस्जिद में नमाज
जांच में यह भी पता चला कि उमर, अपने सह-आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील के साथ, पिछले साल 12 अप्रैल को गुजरात के अहमदाबाद गए थे. इस यात्रा का उद्देश्य विस्फोटक बनाने के लिए आवश्यक रसायन प्राप्त करना था. दोनों ने इलाके की एक मस्जिद में नमाज अदा की और अगले दिन अल फलाह लौट आए.
आरोपपत्र दायर
अधिकारियों ने आरोपियों के मोबाइल फोन से कट्टरपंथी जिहादी साहित्य और विस्फोटक बनाने से संबंधित दस्तावेज बरामद किए. इन्हीं सामग्रियों ने उन्हें प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया था. एनआईए ने 14 मई को लगभग 7,500 पृष्ठों की एक आरोपपत्र दायर की, जिसमें कुल दस आरोपियों के नाम शामिल हैं.