राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों की आबोहवा एक बार फिर से तेजी से बिगड़ने लगी है. 16 अप्रैल को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 226 के आंकड़े पर पहुंच गया, जिसे खराब श्रेणी माना जाता है. हवा में घुलते इस जहर और मौसम के बिगड़ते हालातों का जायजा लेने के बाद एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन की सब-कमेटी ने तत्काल प्रभाव से पूरे एनसीआर में ग्रैप का पहला चरण लागू कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने GRAP का जो बदला हुआ शेड्यूल जारी किया है. उसके अनुसार जब भी वायु गुणवत्ता 201 से 300 के बीच दर्ज होती है, तो GRAP-1 को एक्टिव कर दिया जाता है. प्रशासन की कोशिश है कि समय रहते कड़े कदम उठाकर प्रदूषण को और ज्यादा खतरनाक होने से रोका जाए, ताकि AQI बहुत खराब श्रेणी में न पहुंचे. सभी संबंधित एजेंसियों को इसे सख्ती से लागू करने, मॉनिटर करने और रिव्यू करने का जिम्मा सौंपा गया है.
ग्रैप-1 के लागू होते ही जमीनी स्तर पर प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं:
खुले में आग पर बैन: खुले स्थानों पर किसी भी तरह का कचरा, सूखी पत्तियां या अन्य बायोमास जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.
निर्माण कार्यों पर सख्ती: सभी निर्माण स्थलों पर धूल को रोकने के उपाय करना अब अनिवार्य है. नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
सड़कों की सफाई: धूल को उड़ने से रोकने के लिए सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग के साथ-साथ नियमित रूप से पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाएगा.
CAQM की सब-कमेटी ने साफ कर दिया है कि वह हवा की स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है. IMD और IITM के पूर्वानुमानों के आधार पर ही आगे के फैसले लिए जाएंगे. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि वायु प्रदूषण के हालात और बिगड़ते हैं, तो GRAP के अगले और अधिक कड़े चरण भी लागू किए जा सकते हैं. इसके अलावा, प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे इन नियमों का पालन करें ताकि शहर को घुटने से बचाया जा सके.