जिस लाल किले में चलता था मुगल दरबार, अंग्रेजों ने बना दिया सेना का अड्डा और अदालत

लाल किला मुगल सत्ता का प्रमुख केंद्र था, लेकिन 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजों ने इसे सैन्य छावनी और अदालत के रूप में इस्तेमाल किया. कई ऐतिहासिक इमारतें भी नष्ट कर दी गईं.

Pinterest
Meenu Singh

दिल्ली का लाल किला केवल मुगल स्थापत्य की पहचान नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के कई निर्णायक दौरों का गवाह भी है. मुगल शासन के लंबे दौर के बाद 1857 के विद्रोह ने इसकी भूमिका पूरी तरह बदल दी. अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर को हटाने के बाद किले पर कब्जा कर लिया. इसके बाद शाही निवास की जगह यहां सैनिक गतिविधियां शुरू हुईं और परिसर का बड़ा हिस्सा सैन्य जरूरतों के मुताबिक बदल दिया गया.

मुगल सत्ता खत्म होते ही बदला किले का स्वरूप

1857 के विद्रोह को दबाने के बाद अंग्रेजों ने लाल किले को अपने नियंत्रण में ले लिया. मुगल परिवार से जुड़ी कई कीमती वस्तुएं बाहर भेज दी गईं. किले की कई इमारतें तोड़ी गईं और उनके स्थान पर सैनिकों के लिए बैरक तैयार की गईं. इस बदलाव के साथ कभी शाही जीवन का केंद्र रहा लाल किला ब्रिटिश सैन्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण ठिकाना बन गया.

लाल किला बना अंग्रेजी सेना का प्रमुख ठिकाना

अंग्रेजों ने परिसर में सैनिकों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के रहने की व्यवस्था की. किले का इस्तेमाल सेना के अड्डे के साथ सैन्य अदालतों के लिए भी हुआ. इसी दौरान अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाया गया. उन्हें दोषी ठहराए जाने के बाद बर्मा भेज दिया गया. इस घटना ने मुगल शासन के अंत को औपचारिक रूप से और गहरा कर दिया.


आजाद हिंद फौज के अधिकारियों पर चला मुकदमा

लाल किले का सैन्य अदालत से जुड़ा इतिहास आजादी के अंतिम सालों तक जारी रहा. 1945-46 में यहां आजाद हिंद फौज के अधिकारियों के खिलाफ चर्चित मुकदमा चला. प्रेम सहगल, गुरबख्श सिंह ढिल्लों और शाहनवाज खान पर ब्रिटिश सेना ने कोर्ट मार्शल की कार्रवाई की. यह मुकदमा आगे चलकर लाल किला मुकदमे के नाम से इतिहास में दर्ज हुआ.

आजादी के बाद फिर बदली लाल किले की पहचान

देश की स्वतंत्रता के बाद लाल किले के एक बड़े हिस्से पर भारतीय सेना का नियंत्रण रहा. बाद में इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को दी गई. अंग्रेजी दौर में हुए बदलावों और नुकसान के बावजूद लाल किला आज भी भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर है. मुगल सत्ता, ब्रिटिश शासन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी इसकी घटनाएं इसे खास बनाती हैं.