दिल्ली में बढ़ रहा सांसों का संकट, जहरीली हवा के कारण 2022 से 2 लाख से अधिक गंभीर श्वास रोग के मामले दर्ज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषित हवा, खासकर PM2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रही है.
दिल्ली की हवा एक बार फिर लोगों की सांसों पर भारी पड़ रही है. केंद्र सरकार के नए आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी में पिछले तीन वर्षों में गंभीर श्वास रोग (ARI) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि खराब हवा पहले से बीमार लोगों को और गंभीर स्थिति में पहुंचा रही है. अस्पतालों की इमरजेंसी में खांसी, सांस फूलना और ऑक्सीजन लेवल गिरने की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव साफ दिखने लगा है.
सरकारी आंकड़ों की गंभीर तस्वीर
राज्यसभा में पेश स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार, दिल्ली के छह प्रमुख अस्पतालों से मिली रिपोर्टों में प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है. 2022 में 67,054 ARI केस दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 69,293 तक पहुंच गई. 2024 में कुल मामलों में मामूली कमी जरूर दिखी, लेकिन 10,819 लोगों को भर्ती करना पड़ा, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
हवा की गुणवत्ता पर डॉक्टरों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषित हवा, खासकर PM2.5 और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, फेफड़ों की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रही है. इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरंजीत चटर्जी बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में OPD और भर्ती दोनों में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई है. उनके अनुसार, यह सिर्फ मौसमी बीमारी नहीं, बल्कि प्रदूषण का सीधा प्रभाव है.
अन्य बड़े शहर भी प्रभावित
अन्य महानगरों में भी हालात चिंताजनक हैं. चेन्नई के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों में 2023 और 2024 के दौरान ARI मामलों में स्थिरता दिखी, लेकिन गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ती रही. मुंबई में स्थिति और खराब रही- 2023 में जहां 31 मरीज भर्ती हुए, वहीं 2024 में 474 मरीज भर्जी हुए, जो पांच गुना से अधिक वृद्धि है.
इमरजेंसी कक्षों में बढ़ती भीड़
दिल्ली के अस्पतालों में डॉक्टर बताते हैं कि हर बार जब स्मॉग बढ़ता है, खांसी, घरघराहट, बुखार और ऑक्सीजन लेवल घटने के साथ मरीजों की भीड़ अचानक बढ़ जाती है. खासकर अस्थमा, सीओपीडी और हृदय रोग से जूझ रहे लोगों में हालत तेजी से बिगड़ती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रदूषण के असर अब रोजमर्रा के स्वास्थ्य संकट के रूप में दिखाई देने लगे हैं.
आगे की राह और चुनौतियां
ICMR के अध्ययन में प्रदूषण और बीमारी के बीच गहरा संबंध सामने आया है, जिसे विशेषज्ञ गंभीर चेतावनी मानते हैं. सरकार हर साल राज्यों को AQI आधारित सलाह जारी करती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि वास्तविक सुधार तभी होगा जब वायु गुणवत्ता में ठोस सुधार किए जाएं. फिलहाल, शहरों में धुंध की परत और अस्पतालों में बढ़ते मरीज दोनों यह संकेत दे रहे हैं कि समस्या अभी थमने वाली नहीं है.