ठंड और जहर का डबल अटैक! दिल्ली की हवा 'वेरी पुअर', कई इलाकों में गंभीर स्थिति में AQI
दिल्ली में ठंड और प्रदूषण का डबल अटैक जारी है. AQI ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में बना हुआ है, कई इलाकों में स्थिति ‘सीवियर’ तक पहुंच गई है, जबकि शीतलहर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दी के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी लोगों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है. बुधवार को भी शहर की हवा ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में दर्ज की गई. ठंडे मौसम, कमजोर हवा और बढ़ते प्रदूषण स्रोतों के कारण हालात में सुधार नहीं हो पा रहा है. कई इलाकों में हालात ‘सीवियर’ स्तर तक पहुंच गए हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर खतरा बढ़ गया है.
दिल्ली की हवा अब भी गंभीर संकट में
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार बुधवार शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 353 दर्ज किया गया, जो ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में आता है. यह आंकड़ा एक दिन पहले के 360 से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन राहत देने वाला नहीं माना जा रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर लंबे समय तक बने रहने पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है.
रात होते-होते बढ़ा प्रदूषण का स्तर
दिन ढलने के साथ दिल्ली की हवा और जहरीली होती चली गई. रात 11 बजे तक शहर का औसत AQI बढ़कर 364 पहुंच गया. कई निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जिसे ‘सीवियर’ श्रेणी में रखा जाता है. ऐसे इलाकों में सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं आम हो गई हैं.
ठंड और शीतलहर ने बढ़ाई परेशानी
प्रदूषण के साथ-साथ ठंड भी दिल्लीवासियों की परीक्षा ले रही है. मौसम विभाग (IMD) के अनुसार बुधवार को न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.6 डिग्री कम है. लगातार चौथे दिन शहर के कई हिस्से शीतलहर की चपेट में रहे. ठंडी हवा और कम तापमान के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में ज्यादा देर तक टिके रहे.
मौसम की भूमिका और हालात की वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा की गति बेहद कमजोर रहने से प्रदूषण फैल नहीं पा रहा है. ऊपर से ठंडे मौसम और नमी के कारण स्मॉग की परत बनी हुई है. वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल और आसपास के इलाकों से आने वाला प्रदूषण हालात को और खराब कर रहा है. फिलहाल मौसम में बड़े बदलाव की संभावना कम है.
सेहत को लेकर बढ़ी चिंता, सतर्क रहने की सलाह
डॉक्टरों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को घर के अंदर रहने की हिदायत दी गई है. सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और भारी शारीरिक गतिविधियों से दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है. जब तक हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव मानी जा रही है.