ED केस में अरविंद केजरीवाल की बड़ी जीत, दो केसों में कोर्ट ने किया बरी
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर संक्षिप्त लेकिन भावपूर्ण प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा— “सत्यमेव जयते”. इस एक पंक्ति को सत्य और न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है.
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट से 22 जनवरी 2026 को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई. अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े दो मामलों में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पूरी तरह बरी कर दिया. यह फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल की अदालत ने सुनाया.
किन मामलों में मिली राहत
ये दोनों मामले ईडी द्वारा भेजे गए समन की कथित अवहेलना से जुड़े थे. ईडी का आरोप था कि अरविंद केजरीवाल ने समन का पालन नहीं किया. हालांकि, अदालत ने सभी तथ्यों और दलीलों को सुनने के बाद साफ कहा कि आरोप न्यायिक जांच में साबित नहीं हो पाए. इसके साथ ही दोनों मामलों में केजरीवाल को दोषमुक्त कर दिया गया.
केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर संक्षिप्त लेकिन भावपूर्ण प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा— “सत्यमेव जयते”. इस एक पंक्ति को सत्य और न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है.
‘राजनीतिक साजिश’ के आरोप पर अदालत की मुहर
आम आदमी पार्टी लंबे समय से यह कहती रही है कि ईडी की कार्रवाई राजनीतिक दबाव और साजिश का हिस्सा है. पार्टी का दावा था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को डराने के लिए किया जा रहा है. अदालत के फैसले के बाद पार्टी का कहना है कि यह निर्णय साबित करता है कि लगाए गए आरोप टिकाऊ नहीं थे.
संविधान और कानून के सम्मान की बात
अरविंद केजरीवाल पहले भी कई बार कह चुके हैं कि वे कानून और संविधान का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित कार्रवाई का विरोध करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है. कोर्ट का यह फैसला उसी सोच को मजबूती देता है.
AAP के लिए सिर्फ कानूनी नहीं, नैतिक जीत
आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह फैसला केवल एक कानूनी राहत नहीं, बल्कि नैतिक और वैचारिक जीत भी है. पार्टी ने हमेशा ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को अपनी राजनीति की नींव बताया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर किए गए कामों के साथ यह फैसला भी उसी ईमानदार राजनीति का प्रमाण माना जा रहा है.
लोकतंत्र में न्यायपालिका की ताकत
दिल्ली कोर्ट का यह निर्णय इस बात का भरोसा दिलाता है कि लोकतंत्र में न्यायपालिका स्वतंत्र है और सत्य को दबाया नहीं जा सकता. यह फैसला अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व को राजनीतिक और नैतिक रूप से और मजबूत करता है.