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पार्टी व्हिप के खिलाफ जाने पर राघव चड्ढा पर कार्रवाई हुई, ऐसे बदलाव सभी पार्टियां करती हैं: सीएम भगवंत सिंह मान

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने के बाद पलटवार किया. पार्टी ने पूछा कि वह भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं और पार्टी व्हिप का उल्लंघन क्यों किया.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने को समान्य कार्रवाई बताते उनके बयान पर पलटवार किया है. पार्टी ने राघव चड्ढा पूछा है कि वह देश और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर भाजपा या मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ काम रहे थे. मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने और एलपीजी संकट पर सदन में बोलने से इन्कार करने समेत कई बार राघव चड्ढा ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया. एक लंबे अरसे से राघव चड्ढा ने संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किए हों. पार्टी का कहना है कि केजरीवाल ने सबको निडरता और साहस से लड़ना सिखाया है, लेकिन राघव चड्ढा भाजपा और मोदी सरकार से सवाल करने से डर रहे हैं. ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?

'पार्टी का फैसला है, ऐसे छोटे-छोटे निर्णय होते रहते हैं': भगवंत मान

भगवंत सिंह मान ने राघव चड्ढा के मुद्दे पर कहा कि यह पार्टी का फैसला है. पार्टियां इस तरह के फैसले लेती रहती हैं. संसद में अपना नेता और उपनेता बदलती रहती है. जब मैं पहली बार चुनाव जीता तो उस समय पार्टी ने डॉ. गांधी को नेता बनाया. कुछ समय बाद मैं भी पार्लियामेंट बोर्ड का नेता बना. यह पार्टी का निर्णय है. ऐसे छोटे-छोटे निर्णय होते रहते हैं. कई बार लोकसभा और राज्यसभा में सभी विपक्षी पार्टियों को एकमत में फैसला लेना होता है. जैसे सदन से वॉकआउट करना या सरकार की नीतियों का विरोध करना हो. अगर कोई व्यक्ति इन सामूहिक फैसलों का समर्थन नहीं करता है और पार्टी लाइन के विपरित जाता है तो फिर वह पार्टी के व्हिप के खिलाफ है. कोई भी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाएगा, तो उस पर कार्रवाई होगी.

'राघव चड्ढा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आवाज नहीं निकालते': संजय सिंह

''आप'' के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि हम लोग अरविंद केजरीवाल के सच्चे सिपाही हैं और हमने अरविंद केजरीवाल से एक ही बात सीखी है- निडरता, हिम्मत और साहस के साथ लड़ना और संघर्ष करना. लेकिन बड़े अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि देश के तमाम मुद्दों पर जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं. पश्चिम बंगाल में लोगों के वोट के अधिकार छीने जा रहे हैं. दिल्ली में हम लोगों ने देखा कि किस तरह से चुनाव आयोग का दुरुपयोग हुआ. जब पंजाब का मुद्दा होता है, तो उस वक्त वह खामोश रहते हैं, कुछ नहीं बोलते हैं. वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आवाज नहीं निकालते हैं.

'गुजरात में कार्यकर्ताओं को पीटा जाता है, उस पर भी वह नहीं बोलते'

संजय सिंह ने आगे कहा कि जनहित से जुड़े जो मुद्दे, देश, आम आदमी पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ताओं से जुड़े हुए हैं, उन पर राघव चड्ढा चुप रहते हैं. गुजरात में "आप" कार्यकर्ताओं को पीटा-मारा जाता है, उस पर वह नहीं बोलते हैं. पंजाब के तमाम अधिकारों को छीनने का काम मोदी सरकार करती है, उस पर भी वह कुछ नहीं बोलते हैं. जब बहुत सारे मुद्दों पर सदन से वॉकआउट करने का मामला आता है, तो उस समय वह वॉकआउट नहीं करते हैं. ये तमाम चीजें हैं, जिसका जवाब देश और जनता राघव चड्ढा से चाहती है.

'जो डर गया, समझो मर गया

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा से कहा कि हम सब लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने तो एक ही बात सीखी है कि ''जो डर गया, समझो मर गया.'' हम सबको तो सरकार की आंखों में आंखें डालकर जनता के मुद्दे उठाने थे. पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि जो भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ गंभीर मुद्दे उठाता है, सरकार से सवाल पूछता है और लोगों की बात करता है, सरकार एक तानाशाह की तरह उसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन कर रही है. चाहे वह एक्स हो, फेसबुक हो या यूट्यूब, हर जगह बैन किया जा रहा है. एफआईआर दर्ज कराई जा रही है. मुकदमे किए जा रहे हैं.

'समोसों की बात उठाने से बेहतर है कि देश के बड़े मुद्दे उठाएं'

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई संसद में अपना सॉफ्ट पीआर करे. संसद में एक छोटी सी पार्टी के पास बेहद सीमित समय होता है. उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा है, तो उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दों को उठाया जाए. उन्होंने कहा कि पूरे देश के हर राज्य में हमने देखा है कि चुनाव से पहले सही लोगों के वोट काटे जाते हैं और फर्जी व झूठे वोट बनाकर सरकार पूरी बेईमानी से सिस्टम पर कब्जा करके चुनाव जीत रही है. पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है.

'मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से किया मना'

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभी सारी विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के लिए प्रस्ताव लाना चाहा, लेकिन आपने (राघव चड्ढा) उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. जब भी कोई ऐसा मुद्दा आता है, जिस पर विपक्ष वॉकआउट करता है, तो आप वॉकआउट नहीं करते हैं. पिछले काफी अरसे से मैंने देखा है कि आपने सदन में ऐसा कोई भी मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी या भाजपा सरकार से कोई सवाल किया गया हो. ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?

'जहां से चुनकर आए हैं, उन मुद्दों को उठाने से भी घबराते हैं'

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम लोगों को पंजाब के मुद्दे उठाने हैं. जहां से आप चुनकर आए हैं, आप उन मुद्दों को उठाने से भी घबराते हैं. अभी गुजरात में आम आदमी पार्टी के करीब 160 कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमों के तहत एफआईआर दर्ज की गई, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन आप उस पर भी चुप रहे. आम आदमी पार्टी के तमाम नेता जेल में थे. अरविंद केजरीवाल को बतौर मुख्यमंत्री सरकार ने एक झूठे मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया, उस समय भी आप देश में नहीं थे और कहीं जाकर छिप गए थे.

'भाजपा तो गुरुवार से आपको सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रही है'

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मेरा मानना यह है कि देश के लिए असली मुद्दे हमें निडरता और साहस के साथ उठाने पड़ेंगे. भाजपा की आंखों में आंखें डालकर मुद्दे उठाने पड़ेंगे. वरना आपके इन सॉफ्ट मुद्दों से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता. बल्कि भाजपा तो गुरुवार से आपको सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रही है. आप इस बारे में सोचिएगा और देखिएगा कि आप कहां से चले थे और कहां आ गए हैं. देश को किन चीजों की जरूरत है और आप कैसे बेहतर कर सकते हैं.

'भाजपा पर सवाल उठाने से क्यों डरते हैं?': आतिशी ने राघव से पूछा

उधर, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने राघव चड्ढा से सवाल करते हुए कहा कि वह भाजपा से इतना क्यों डरते हैं? वह भाजपा पर सवाल उठाने से क्यों डरते हैं? वह मोदी जी से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं? आज हमारा देश एक बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है. आज हमारे देश के लोकतंत्र और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है. आज हमारी आंखों के सामने चुनाव आयोग का दुरुपयोग करके पश्चिम बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, लेकिन वह उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं. वह उस पर बोलने से डर रहे हैं.

'पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर हो रहे हमले पर क्यों नहीं उठाते सवाल?'

आतिशी ने कहा कि हम सबने देखा है कि किस तरह से दिल्ली में गलत तरीके से वोट काटे गए. भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गलत तरीके से वोट बनाए और भाजपा चुनाव चुराकर ले गई. आज पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है, वहां भी चुनाव आयोग का दुरुपयोग हो रहा है. लेकिन जब तृणमूल कांग्रेस और पूरा विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर देते हैं. क्या उन्होंने एक बार भी संसद में पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर हो रहे हमले पर सवाल उठाए? वोट काटने पर सवाल उठाए? गलत तरीके से बन रहे वोटों पर सवाल उठाए? उन्होंने ये सवाल क्यों नहीं उठाए? क्या वह भाजपा से डर रहे हैं? क्या वह मोदी जी से डर रहे हैं?

'एलपीजी के मुद्दे पर बोलने को कहा गया तो चुप रह गए'

आतिशी ने कहा कि आज देश के आम आदमी के सामने सबसे बड़ा संकट एलपीजी गैस सिलेंडर का है. राघव चड्ढा तो बड़े आदमी हैं, राज्यसभा के सांसद हैं, हो सकता है उनको दिक्कत ना आती हो. लेकिन एक आम परिवार, एक छोटे से मकान या कच्ची कॉलोनी में रहने वाले और एक गैस सिलेंडर कनेक्शन वाले परिवार को आज अपने बच्चों के लिए खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है. पिता सोच रहे हैं कि काम पर जाऊं और दिहाड़ी लेकर आऊं, या लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होकर गैस का सिलेंडर ले आऊं ताकि कल मेरे बच्चों के लिए लंच बन सके.

आतिशी ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब में और दिल्ली विधानसभा में सिलेंडर का सवाल उठाया, जब आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एलपीजी सिलेंडर का मुद्दा उठाया और जब राघव चड्ढा को एलपीजी के मुद्दे पर बोलने के लिए कहा गया, तो वह चुप रह गए. क्या वह मोदी जी से डर गए हैं? आज इस देश में हर इंसान को यह तय करना होगा कि क्या वह मोदी जी के साथ है या वह संविधान और लोकतंत्र के साथ है.

'जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए, तब राघव चड्ढा लंदन में थे'

आतिशी ने कहा कि मुझे याद आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए थे, तब हम सब सड़कों पर खड़े होकर लड़ रहे थे. पुलिस हम पर लाठियां बरसा रही थी और हमें घसीट-घसीट कर पकड़ कर ले जा रही थी. दिल्ली के अलग-अलग थानों में, कहीं नरेला में, तो कहीं बवाना में हम डिटेन किए गए थे. हम रोज सड़कों पर लड़ रहे थे और तब राघव चड्ढा लंदन में थे. उन्होंने हमें बताया था कि उनकी आंख का ऑपरेशन हो रहा है, इसलिए वह लंदन में हैं. तब मीडिया ने हमसे बहुत सवाल पूछे. बार-बार हमने मीडिया से कहा कि राघव चड्ढा डरे नहीं हैं. उनकी आंख में दिक्कत है और वह अपना ऑपरेशन करवाने गए हैं. लेकिन आज मेरे मन में भी यह सवाल आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए, क्या तब भी वह भाजपा से डर गए थे? क्या तब भी वह मोदी जी से डर गए थे? क्या वह डर कर लंदन भाग गए थे?

'हम ना भाजपा से डरते हैं, ना मोदी से, ना जेल से'

आतिशी ने आगे कहा कि हो सकता है कि राघव चड्ढा मोदी जी से डरते हों, हो सकता है कि वह जेल जाने से डरते हों. लेकिन हम अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं. हम ना भाजपा से डरते हैं, ना मोदी जी से डरते हैं, ना उनकी एजेंसियों से डरते हैं और ना ही जेल जाने से डरते हैं. इसलिए हम इस देश के आम आदमी की आवाज उठाते आए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे. हम इस लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते आए हैं और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते रहेंगे. मोदी जी या भाजपा से डरने से संविधान और लोकतंत्र नहीं बचेगा. आज राघव चड्ढा को यह तय करना है कि क्या वह संविधान के साथ हैं या फिर मोदी जी के साथ हैं.

'समोसे सस्ते करवाने के लिए नहीं, देश बचाने के लिए मिलता है समय'

वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि हम केजरीवाल के सिपाही हैं. निडरता ही हमारी पहली पहचान है. कोई मोदी से डर जाए तो देश के लिए क्या लड़ेगा? पार्टी को संसद में बोलने का थोड़ा सा समय मिलता है. उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का. गुजरात में हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ता भाजपा की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए, क्या सांसद साहब सदन में कुछ बोले?

'मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो, जो डर गया वो समझो मर गया'

अनुराग ढांडा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है. सदन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आया तो भाई साहब ने साइन करने से मना कर दिया. पार्टी ने सदन से वाकआउट किया तो मोदी जी की हाज़िरी लगाने के लिए बैठे रहते हैं. पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव. मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो. देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो. जो डर गया वो समझो मर गया.