Naxalites Declared Ceasefire: आत्मसमर्पण या कोई चाल? पहली बार हथियार छोड़ने को नक्सली तैयार, सरकार कर रही प्रस्ताव की जांच
सीपीआई (माओवादी) ने पहली बार हथियार छोड़ने और अस्थायी संघर्ष विराम की पेशकश की है. संगठन ने सरकार से एक महीने का समय मांगा है ताकि सभी कैडर और नेताओं से राय ली जा सके. छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्र ने बयान की जांच शुरू कर दी है. माना जा रहा है कि सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों और शीर्ष नेतृत्व की मौत के बाद माओवादी अब आत्मसमर्पण के रास्ते पर हैं.
Naxalites Declared Ceasefire: देश में नक्सल विरोधी अभियानों के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. सीपीआई यानी माओवादी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में हथियार छोड़ने और अस्थायी संघर्ष विराम पर सहमति जताई है. यह बयान संगठन के शीर्ष नेता ‘अभय’ यानी मल्लोजुला वेंगुपाल राव के हस्ताक्षर के साथ जारी हुआ है. बताया गया कि अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और शीर्ष नेतृत्व के खात्मे के बाद संगठन मजबूरी में यह कदम उठा रहा है.
प्रेस विज्ञप्ति में माओवादियों ने सरकार से एक महीने का समय मांगा है ताकि वे अपने नेताओं और कैडर से देशभर में, यहां तक कि जेलों में बंद सदस्यों से भी चर्चा कर सकें. संगठन का कहना है कि वे शांति पहल पर आम सहमति बनाने की कोशिश करेंगे. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि वे गृह मंत्री या केंद्र सरकार के अन्य प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए तैयार हैं.
सुरक्षा बलों का दबाव
साल 2025 में ही नक्सल विरोधी अभियानों में सीपीआई (माओवादी) के महासचिव बसवराजु समेत सात केंद्रीय समिति सदस्यों को मार गिराया गया. कुल 28 से अधिक वरिष्ठ सदस्य इस दौरान मारे गए. सुरक्षा बलों का दबाव इतना बढ़ गया कि माओवादी अब हथियार छोड़ मुख्यधारा में शामिल होने का रास्ता तलाश रहे हैं.
बयान की प्रामाणिकता पर सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्रीय एजेंसियों ने फिलहाल इस बयान की जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि यह प्रेस विज्ञप्ति पिछली बार से अलग है क्योंकि इसमें अभय की फोटो भी शामिल है. छत्तीसगढ़ पुलिस ने कहा है कि किसी भी संवाद या वार्ता का निर्णय केवल सरकार करेगी और हालात की समीक्षा के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा.
केंद्र का रुख
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीते महीनों में हुए बड़े अभियानों ने माओवादियों को हाशिये पर पहुंचा दिया है. अब उनके पास आत्मसमर्पण और शांति प्रक्रिया में शामिल होने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचा है. हालांकि, बयान की प्रामाणिकता पर मुहर लगना बाकी है.
माओवादी रुख में बदलाव
प्रेस रिलीज में माओवादियों ने कहा कि मार्च 2025 से ही वे बातचीत करना चाह रहे थे और 10 मई को हथियार छोड़ने का प्रस्ताव भी रखा था लेकिन केंद्र सरकार की ओर से जवाब मिलने के बजाय अभियानों की रफ्तार और तेज कर दी गई. संगठन ने कहा कि बदलते राष्ट्रीय और वैश्विक हालात के मद्देनजर और प्रधानमंत्री, गृह मंत्री व पुलिस अधिकारियों की अपीलों को देखते हुए उन्होंने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया है. आगे वे जनता के अधिकारों की लड़ाई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जारी रखेंगे.
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