CGPSC भर्ती घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, टामन सोनवानी समेत 6 पर चार्जशीट

CGPSC भर्ती घोटाला मामले में ED ने पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत छह आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है.

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Km Jaya

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी CGPSC भर्ती घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ा कदम उठाया है. एजेंसी ने पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी समेत छह आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है.  करीब 3700 पन्नों के आरोप पत्र के साथ 99 पन्नों का सारांश भी पेश किया गया है. इसमें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने, रिश्तेदारों को चयन में लाभ पहुंचाने और अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये जुटाने से जुड़े आरोपों का विवरण दिया गया है.

ED के मुताबिक तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी पर अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव कराने का आरोप है. एजेंसी के अनुसार, 14 जुलाई 2021 की बैठक में नियमों में 'रिलेटिव' की जगह 'फैमिली' शब्द किया गया और 'नेफ्यू' को परिवार की परिभाषा से बाहर कर दिया गया.

आरोप पत्र में दावा किया गया है कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने भतीजों नितेश और साहिल को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया. ED के अनुसार, इसके बाद दोनों का चयन क्रमशः डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी पद पर हुआ.


प्रश्नपत्र की गोपनीयता तोड़ने में सहयोग का आरोप

आरोप पत्र के मुताबिक, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने टामन सोनवानी के साथ मिलकर प्रश्नपत्र श्रवण गोयल तक पहुंचाने में सहयोग किया. एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद प्रश्नपत्र उनके बेटे शशांक और बहू भूमिका तक पहुंचा. ED के अनुसार, शशांक और भूमिका दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ. एजेंसी ने इसे परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने से जुड़ा मामला बताया है.

अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने का आरोप

ED ने चेतन बोरघरिया की भूमिका का भी आरोप पत्र में उल्लेख किया है. एजेंसी के अनुसार, उन्होंने OSD पद के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अभ्यर्थियों को नौकरी और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भरोसा दिया. आरोप पत्र के मुताबिक, चेतन बोरघरिया के खाते में 170 लेनदेन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपये नकद जमा हुए. ED ने इन लेनदेन को भर्ती घोटाले से जुड़े कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच में महत्वपूर्ण माना है.

तीन करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने का आरोप

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने भी अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की रकम जुटाई. एजेंसी का आरोप है कि उत्कर्ष ने केके चंद्रवंशी और मुख्यमंत्री कार्यालय के तत्कालीन OSD के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल किया. आरोप पत्र के मुताबिक, जुटाई गई रकम में से करीब 2.80 करोड़ रुपये अनिल चंद्राकर को दिए गए. ED ने इस रकम के आगे हुए लेनदेन की भी जांच की है.

3700 पन्नों की चार्जशीट में कई लेनदेन का ब्योरा

ED की ओर से दाखिल आरोप पत्र में कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी, प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग करने, रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने और अभ्यर्थियों से रकम जुटाने से जुड़े मामलों का विस्तृत विवरण दिया गया है. हालांकि आरोप पत्र में लगाए गए आरोपों का अदालत में परीक्षण होना बाकी है. आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया में साबित किया जाना है. अब मामले में आगे की कार्रवाई विशेष अदालत में होगी.