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India Daily

महिला आरक्षण पास न होने पर भड़के CM साय, छत्तीसगढ़ में बुलाया विशेष सत्र; 27 अप्रैल तक विपक्ष पर हल्ला बोल

छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद घमासान मच गया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने जा रही है.

Ashutosh Rai
Edited By: Ashutosh Rai
महिला आरक्षण पास न होने पर भड़के CM साय, छत्तीसगढ़ में बुलाया विशेष सत्र; 27 अप्रैल तक विपक्ष पर हल्ला बोल
Courtesy: Social media

रायपुर: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास न हो पाने के बाद अब सियासत के मैदान में घमासान मच गया है. केंद्र में बिल गिरने के बाद अब छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष को बैकफुट पर धकेलने के लिए अपनी कमर कस ली है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऐलान किया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने जा रही है, जहां विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाकर उन्हें क्लीन बोल्ड करने की तैयारी है.

विपक्ष के खिलाफ 27 अप्रैल तक नॉन-स्टॉप प्रदर्शन

रायपुर में बीजेपी महिला मोर्चा की एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए सीएम साय फ्रंटफुट पर नजर आए. उन्होंने विपक्षी दलों पर आधी आबादी के हक में रोड़ा अटकाने का गंभीर आरोप लगाया. सियासत के इस कड़े मुकाबले में सरकार ने सिर्फ सदन के अंदर ही नहीं, बल्कि सड़क पर भी विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है. राज्यभर में 20 अप्रैल से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन 27 अप्रैल तक लगातार जारी रहेगा. 

पार्टी की रणनीति के मुताबिक:

23 और 24 अप्रैल: सभी जिला स्तरों पर विशाल जनसभाएं और प्रदर्शन.

26 और 27 अप्रैल: मंडल स्तर पर विपक्ष का पुतला दहन और प्रतीकात्मक विरोध.

क्यों मचा है यह सियासी बवाल?

यह पूरा विवाद 131वें संविधान संशोधन बिल के लोकसभा में पास न हो पाने के बाद शुरू हुआ. इस बिल का लक्ष्य लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करना और महिलाओं के लिए 33% सीटें पक्की करना था. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 सांसदों ने वोटिंग की. बिल को पास कराने के लिए 352 के जादुई आंकड़े की दरकार थी, जो हासिल नहीं हो सका.

PM मोदी ने मांगी माफी

संसद में बिल गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए देश की महिलाओं से माफी मांगी थी. साथ ही विपक्ष पर राजनीतिक स्वार्थ को देशहित से ऊपर रखने का आरोप लगाया था. वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मौके पर अपने लोकल रिकॉर्ड का भी हवाला दिया. अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में पहले से ही पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 57% और विधानसभा में 20% से ज्यादा का प्रतिनिधित्व हासिल है.

चुनावों से पहले खेला मास्टसट्रोक

अब सबकी निगाहें छत्तीसगढ़ के इस विशेष सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार और विपक्ष के बीच एक और जोरदार 'सियासी मैच' देखने को मिलेगा. इस आक्रामक रणनीति को आने वाले चुनावों के लिए महिला वोटरों को अपने पाले में करने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है.