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तिलक से लौट रहे चार भाइयों के लिए 'काल' बना डिवाइडर, भीषण सड़क हादसे में 3 चचेरे भाइयों की मौत; पसरा मातम

बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन चचेरे भाइयों की जान चली गई, जबकि चौथा भाई जीवन-मौत के बीच जूझ रहा है. तेज रफ्तार कार के पुल के डिवाइडर से टकराने के कारण यह भयावह मंजर पैदा हुआ.

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Kanhaiya Kumar Jha

पटना: बिहार के नालंदा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक खुशहाल तिलक समारोह से वापसी मातम में बदल गई. मंगलवार तड़के करीब 3 बजे एक तेज रफ्तार कार एकंगरसराय-जहानाबाद मुख्य मार्ग पर कत्थार के पास पुल के डिवाइडर से जा टकराई. इस भीषण टक्कर में तीन चचेरे भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है.

मृतकों की पहचान सोनू कुमार (21), रोहित कुमार (22) और उद्देश्य (18) के रूप में हुई है. ये सभी जहानाबाद जिले के तेनी बीघा गांव के रहने वाले थे और आपस में चचेरे भाई थे. जानकारी के मुताबिक, ये चारों युवक पटना जिले के मसोढ़ा में अपने एक दोस्त के तिलक समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे. रात का सन्नाटा और घर पहुंचने की जल्दी के बीच कत्थार पुल के पास उनकी कार अनियंत्रित हो गई.

तेज रफ्तार और खराब रोशनी बनी वजह

पुलिस के अनुसार, कार की रफ्तार काफी अधिक थी. प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस का कहना है कि सामने से आ रहे एक वाहन को बचाने की कोशिश में चालक ने कार पर से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद कार सीधे कंक्रीट के डिवाइडर से टकरा गई. टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और अंदर बैठे युवक बुरी तरह कुचल गए. दो भाइयों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तीसरे की मौत अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुई.

अस्पताल में मौत से जूझ रहा एक युवक

इस भयावह हादसे में 19 वर्षीय सूरज इकलौता जीवित बचा है, लेकिन उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है. उसे स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (PMCH) रेफर कर दिया गया है. जैसे ही यह खबर तेनी बीघा गांव पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

सड़क सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. यह हादसा एक बार फिर बिहार के राजमार्गों पर खराब रोशनी, तेज रफ्तार और खतरनाक ओवरटेकिंग की समस्या को उजागर करता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़कों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और उचित लाइटिंग की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे 'खूनी मोड़ों' पर किसी और का चिराग न बुझे.