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मुस्लिम और OBC ने दिया महागठबंधन को झटका! जानें किस समुदाय ने किसे दिया वोट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए दोनों फेजों की वोटिंग हो चुकी है और इसके नतीजे 14 नवंबर को आने हैं. हालांकि, इससे पहले एग्जिट पोल ने महागठबंधन को झटका दिया है.

@yadavtejashwi (X)
Praveen Kumar Mishra

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव अब खत्म हो चुके हैं. दोनों चरणों में लोगों ने जोरदार मतदान किया. दूसरे चरण में तो वोटिंग का आंकड़ा 68.79 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो रिकॉर्ड है. पहले चरण में करीब 64 प्रतिशत वोट पड़े थे. 

कुल मिलाकर औसतन 66.93 प्रतिशत मतदान हुआ. अब एग्जिट पोल के नतीजे आ गए हैं. ज्यादातर सर्वे बता रहे हैं कि नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए फिर से सत्ता में आएगी.

एग्जिट पोल में एनडीए को बढ़त

एक प्रमुख एग्जिट पोल में एनडीए को 147 से 167 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है. वहीं तेजस्वी यादव के महागठबंधन को 70 से 90 सीटें ही मिल सकती हैं. अन्य पार्टियों जैसे जनसुराज को 0 से 2 और बाकी को 2 से 8 सीटें अनुमानित हैं. इन नतीजों से साफ है कि ओबीसी और दलित समुदायों ने नीतीश कुमार के गठबंधन को मजबूत समर्थन दिया है.

ओबीसी का 51% वोट एनडीए को

सर्वे के मुताबिक 51 प्रतिशत ओबीसी मतदाताओं ने एनडीए को वोट दिया. इसी तरह 49 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) के लोगों ने भी सत्तारूढ़ गठबंधन का साथ चुना. दूसरी तरफ 78 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों ने महागठबंधन को चुना. 

तेजस्वी यादव और राहुल गांधी लगातार ओबीसी, दलित और मुस्लिमों के अधिकारों की बात करते रहे हैं. वे आरक्षण की सीमा बढ़ाने का वादा भी करते हैं. फिर भी ओबीसी का बड़ा हिस्सा एनडीए के साथ खड़ा हुआ. 

बिहार का जातीय गणित

बिहार में जाति चुनाव का बड़ा फैक्टर है. राज्य की आबादी 13 करोड़ से ज्यादा है. इसमें 60 प्रतिशत से अधिक लोग हाशिए के समुदायों से हैं. कुल मिलाकर 85 प्रतिशत आबादी ओबीसी, ईबीसी, एससी या एसटी से आती है. 

आंकड़ों में देखें तो ईबीसी 36 प्रतिशत, बीसी 27.1 प्रतिशत, एससी 19.7 प्रतिशत और एसटी 1.7 प्रतिशत हैं. सामान्य वर्ग सिर्फ 15.5 प्रतिशत है. ऐसे में वोटों का बंटवारा जाति के आधार पर ही होता है.

टिकट बंटवारे में यादव पर फोकस

चुनाव में उम्मीदवारों के चयन से भी जातीय रणनीति साफ दिखी. महागठबंधन ने यादव समुदाय को ज्यादा तवज्जो दी. उन्होंने 67 यादव उम्मीदवारों को मैदान में उतारा. एनडीए ने सिर्फ 19 यादवों को टिकट दिए. 

नीतीश कुमार ने अपनी कुर्मी जाति से 14 लोगों को मौका दिया, जबकि विपक्ष ने सिर्फ सात कुर्मी उम्मीदवार उतारे. दोनों गठबंधनों ने अन्य जातियों में लगभग बराबर टिकट बांटे लेकिन यादव वोट बैंक पर महागठबंधन की नजर ज्यादा थी.