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पार्टी गंवाई, छिना बचपन का आंगन, एक रात में बिखरा परिवार, जीरो से हीरो कैसे बने चिराग पासवान?

Chirag Paswan Journey: तीन साल पहले राजनीति में हाशिए पर जा चुके चिराग पासवान अब केंद्र सरकार में मंत्री बन गए हैं. उन्हें वही मंत्रालय भी मिला है जो उनके पिता संभालते रहे थे. चिराग के लिए यह सब नायाब है क्योंकि एक वक्त ऐसा लग रहा था कि चिराग की राजनीति खत्म हो गई है और हर चीज पर उनके चाचा पशुपति पारस का कब्जा हो गया है. हालांकि, अब चिराग ने वह सब वापस ले लिया है.

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इतिहास गवाह है कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता. इसका एक उदाहरण है, बिहार की दलित राजनीति में गहरी पैठ जमाने वाला पासवान परिवार. इस परिवार में लोक जनशक्ति पार्टी पर कब्जे के लिए चिराग पासवान बनाम पशुपति कुमार पारस की लड़ाई हुई. इस तकरार की पूरी पटकथा शुरू होती है आज ही के दिन यानी 14 जून 2021, जब रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी में टूट हुई थी. यहीं से शुरू होता है चिराग पासवान के जीरो से हीरो बनने तक का सफर.

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के देहांत के बाद भाई पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच पार्टी पर कब्जे की कोशिशें शुरू हो गईं. हालांकि, इस लड़ाई में चाचा पशुपति पारस की जीत हुई और फिर पार्टी के बड़े नेता समेत मंत्री पद और पटना स्थित कार्यालय उनके हिस्से में आ गया. 7 जुलाई 2021 को पशुपति पारस केंद्रीय मंत्री बन गए. चिराग पासवान को केंद्र से लेकर राज्य की सत्ता तक से बाहर कर दिया गया.

बैकफुट पर थे चिराग पासवान

पिता रामविलास पासवान के नाम पर मिला बंगला भी उनसे छीन लिया गया, चिराग पूरी तरह से बैकफुट पर आ गए. ऐसा लग रहा था कि चिराग की राजनीतिक पारी पर ही विराम लग जाएगा लेकिन एक लंबी पॉलिटिकल लड़ाई के बाद चिराग पासवान को अपनी विरासत वाली सीट वापस मिल गई. मौजूदा वक्त में चिराग की पार्टी एनडीए के सबसे अहम घटक दलों में से एक हो गई है.

कैसे चिराग पासवान बने स्टार परफॉर्मर?

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 चिराग पासवान के लिए काफी अहम साबित हुआ. इस चुनाव में चिराग ने बिहार की पांच सीटों पर ऐसे चेहरों को उतारा था जो राजनीति में नए थे बावजूद इन पांचों सीटों पर चिराग पासवान की पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन के साथ शानदार जीत हासिल की. बता दें कि बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट से चिराग पासवान ने 1.70 लाख वोटों से जीत दर्ज की है.

शानदार जीत के बाद चिराग पासवान को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है.उनके (चिराग) मंत्री पदभार संभालते ही चाचा पशुपति पारस के सुर बदल गए और उन्होंने चिराग को बड़ा बेटा कहकर बधाई दी है. 

राजनीति में एंट्री करने से पहले चिराग ने फिल्मी दुनिया में भी अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन वहां उन्हें कोई विशेष सफलता हाथ नहीं लगी. हिमाचल के मंडी से बीजेपी के सांसद कंगना रनौत के साथ चिराग पासवान ने 2011 में 'मिले ना मिले हम' मूवी में मुख्य किरदार में नजर आए थे. हालांकि, यह फिल्म फ्लॉप होगी गई थी.