बिहार में दो लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, 2025-30 तक एक करोड़ रोजगार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में पिछले आठ-नौ महीनों में करीब दो लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और साढ़े छह लाख लोगों को रोजगार मिला है. सरकार ने 2030 तक एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है.
राजधानी पटना के बापू सभागार में गुरुवार को आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफल 2,027 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए. नवनियुक्त पदाधिकारी राज्य सरकार के 25 अलग-अलग विभागों में अपनी सेवाएं देंगे.
मुख्यमंत्री ने कुछ अभ्यर्थियों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपे, जबकि अन्य नियुक्ति पत्र मंत्रियों के माध्यम से वितरित किए गए. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकारी सेवा में नियुक्ति उनके जीवन का महत्वपूर्ण अवसर है. उन्होंने कहा कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों को नियुक्ति पत्र देना अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है.
करोड़ों युवाओं को नौकरी देने की तैयारी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में युवाओं को नौकरी देने के साथ-साथ उनके लिए स्वरोजगार के भी रास्ते खोले जा रहे हैं. उनके अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिहार में 12 लाख सरकारी नौकरियां और 50 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं. अब साल 2030 तक लगभग एक करोड़ युवाओं को नौकरी देने की कोशिश है. उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य सरकार इस लक्ष्य को निश्चित रूप से पूरा करेगी. सरकार का जोर ऐसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर है, जहां बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें.
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कई क्षेत्रों में निवेश की तैयारी
सीएम चौधरी ने बताया कि बिहार का बजट बढ़ गया है और शहरी विकास को गति देने के लिए टाउनशिप विकसित की जाने की तैयारी है. इन परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश आने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि बिहार को स्टील हब बनाने के साथ सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को भी प्राथमिकता दी जा रही है. इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
समारोह में मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पदाधिकारियों से कहा कि सरकारी नौकरी केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि जनता की सेवा और कल्याण का माध्यम है. उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की.