Budget 2026

बीएसएससी अध्यक्ष आलोक राज का अचानक इस्तीफा, निजी कारणों से लिया फैसला

बिहार कर्मचारी चयन आयोग के नवनिुक्त अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक राज ने पदभार संभालने के मात्र कुछ दिनों बाद ही इस्तीफा दे दिया है.

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Gyanendra Sharma

पटना: बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) के नवनिुक्त अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक राज ने पदभार संभालने के मात्र कुछ दिनों बाद ही इस्तीफा दे दिया है. इस फैसले ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. आलोक राज ने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट रूप से निजी कारणों का उल्लेख किया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का अनुरोध किया है.

31 दिसंबर 2025 को बिहार पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे

आलोक राज, जो 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी रहे हैं, 31 दिसंबर 2025 को बिहार पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे. सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन राज्य सरकार ने उन्हें बीएसएससी का अध्यक्ष नियुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी. यह नियुक्ति पांच वर्षों के लिए या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक प्रभावी होने वाली थी. 1 जनवरी 2026 से उन्होंने औपचारिक रूप से आयोग की कमान संभाली थी.

इस्तीफा देने का क्या है कारण? 

हालांकि, पद संभालने के सिर्फ पांच दिनों के भीतर ही आलोक राज ने सामान्य प्रशासन विभाग को अपना इस्तीफा सौंप दिया. सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे में किसी प्रकार के प्रशासनिक दबाव या राजनीतिक विवाद का जिक्र नहीं है. यह पूरी तरह से व्यक्तिगत आधार पर लिया गया निर्णय बताया जा रहा है. आलोक राज का यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि वे लंबे समय से पुलिस महकमे में महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं और उनकी नियुक्ति को आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा था.

बीएसएससी बिहार में विभिन्न सरकारी विभागों के लिए ग्रुप सी और डी स्तर की भर्तियां आयोजित करने वाला प्रमुख संवैधानिक निकाय है. वर्तमान में आयोग के सामने कई बड़ी भर्ती प्रक्रियाएं लंबित हैं, जिनमें हजारों पदों पर नियुक्तियां होनी हैं. इन परीक्षाओं और भर्तियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूरा करने की चुनौती बढ़ गई है. आलोक राज के इस्तीफे से अब आयोग में नेतृत्व की कमी हो गई है, जिससे इन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है.

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे महत्वपूर्ण पद पर इतनी जल्दी बदलाव से आयोग की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता पर सवाल उठ सकते हैं. सरकार की ओर से अभी नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. फिलहाल, आयोग के मौजूदा सदस्य और अधिकारी दैनिक कार्यों का संचालन कर रहे हैं.