बिहार में पहले फेज में महिलाओं ने मर्दों से 8 फीसदी ज्यादा की वोटिंग, क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित?
चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, कुल 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें महिलाओं ने पुरुषों से कहीं अधिक उत्साह दिखाया.
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र के पर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. 6 नवंबर को 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में कुल 65.08 प्रतिशत वोट पड़े, जो राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा है. यह आंकड़ा न केवल 2020 के विधानसभा चुनाव के 57.29 प्रतिशत से करीब 8 प्रतिशत अधिक है.
चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, कुल 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें महिलाओं ने पुरुषों से कहीं अधिक उत्साह दिखाया. महिलाओं का मतदान प्रतिशत 69.04 रहा, जबकि पुरुषों का 61.56 प्रतिशत. महिलाओं ने लगभग 8 प्रतिशत के अंतर से बढ़त हासिल की. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रेंड विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर महिलाओं की बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है.
मीनापुर से कुम्हरार तक का फर्क
पहले चरण के मतदान में क्षेत्रीय विविधता साफ नजर आई. सबसे अधिक वोटिंग मुजफ्फरपुर जिले की मीनापुर विधानसभा सीट पर दर्ज की गई, जहां 77.54 प्रतिशत मतदाताओं ने हिस्सा लिया. इसके अलावा समस्तीपुर (70.63%) और वैशाली (67.37%) जैसे जिलों में भी मतदान का ग्राफ ऊंचा रहा. तिरहुत और कोसी क्षेत्रों में औसत से अधिक उत्साह देखा गया, जहां कुल 46 सीटों पर 69.05 प्रतिशत वोटिंग हुई.
दूसरी ओर, सबसे कम मतदान पटना जिले की कुम्हरार सीट पर हुआ, जहां केवल 40.17 प्रतिशत वोट पड़े. शहरीकरण और व्यस्त जीवनशैली को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है. पुरुष मतदाताओं के मामले में बोचाहन सीट पर 73.78 प्रतिशत वोटिंग सबसे ऊंची रही, जबकि कुम्हरार में यह न्यूनतम 41.10 प्रतिशत पर सिमट गई. महिलाओं ने मीनापुर में 82.49 प्रतिशत के साथ शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन कुम्हरार में यह आंकड़ा 39.19 प्रतिशत तक गिर गया.
25 वर्षों का रिकॉर्ड ध्वस्त
बिहार में पिछले पांच विधानसभा चुनावों (2000 से 2020 तक) में मतदान प्रतिशत कभी 57 प्रतिशत को पार नहीं कर सका. 2020 में 56.93 प्रतिशत का आंकड़ा सबसे ऊंचा था, जबकि 2005 के अक्टूबर चुनाव में यह घटकर 45.85 प्रतिशत रह गया. 1951-52 के पहले चुनाव से लेकर अब तक के सभी रिकॉर्ड इस चरण की वोटिंग ने तोड़ दिए हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के 56.28 प्रतिशत से भी यह 8.8 प्रतिशत अधिक है.
क्या कहते हैं राजनीतिक दल?
एनडीए और महागठबंधन दोनों ने इस उच्च मतदान को अपनी जीत का संकेत बताया है. जेडीयू नेता ने कहा, यह जनता का विकास के प्रति समर्थन है. वहीं, आरजेडी ने इसे "परिवर्तन की लहर" करार दिया. अब सभी की नजरें दूसरे चरण पर हैं, जहां 10 नवंबर को 20 जिलों की 94 सीटों पर वोटिंग होगी.