Budget 2026

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, महिला रोजगार योजना की सहायता राशि 10 हजार से बढ़ाकर की 2 लाख रुपए

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता 10,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक कर दी गई है. यह अतिरिक्त राशि महिलाओं के कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर दी जाएगी.

pinterest
Sagar Bhardwaj

बिहार सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता 10,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक कर दी गई है. यह अतिरिक्त राशि महिलाओं के कामकाज और प्रदर्शन के आधार पर दी जाएगी.

कैबिनेट बैठक के बाद फैसला

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बढ़ी हुई सहायता राशि किस्तों में दी जाएगी और यह देखा जाएगा कि पहले मिले 10,000 रुपये का सही उपयोग रोजगार शुरू करने में किया गया या नहीं.

परफॉर्मेंस से जुड़ी होगी अगली सहायता

योजना के तहत जिन महिलाओं को पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये मिल चुके हैं, उनके काम की छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी. अगर महिला ने उस राशि से सही तरीके से स्वरोजगार शुरू किया है, तो उसे आगे अतिरिक्त आर्थिक मदद दी जाएगी. जरूरत पड़ने पर अच्छी तरह चल रहे काम के लिए एकमुश्त राशि भी दी जा सकती है.

1.56 करोड़ महिलाओं को मिल चुकी है पहली किस्त

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना का उद्देश्य है कि हर परिवार की एक महिला को आत्मनिर्भर बनाया जाए. अब तक राज्य में 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को सीधे उनके बैंक खाते में 10,000 रुपये DBT के जरिए दिए जा चुके हैं. ग्रामीण और शहरी इलाकों की बाकी पात्र महिलाओं को भी जल्द राशि दी जाएगी.

मार्केटिंग और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर

सरकार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए मार्केटिंग की बेहतर व्यवस्था की जाए. इसके साथ ही महिलाओं को सरकारी योजनाओं जैसे यूनिफॉर्म सिलाई, सुधा बिक्री केंद्र और दीदी की रसोई से जोड़ा जाएगा, ताकि उनके उत्पादों को बाजार मिल सके.

पलायन रोकने और स्थानीय रोजगार पर फोकस

नीतीश कुमार ने कहा कि इस योजना से महिलाओं को राज्य में ही रोजगार मिलेगा और लोगों को काम के लिए बिहार से बाहर जाने की मजबूरी नहीं होगी. सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई सहायता से महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. यह फैसला बिहार में महिलाओं की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.