नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण से पहले खींचतान तेज, जानिए किसके पाले में आएगी कौन सी कुर्सी
बिहार में नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण से ठीक पहले जेडी(यू) और बीजेपी के बीच मंत्रालयों, स्पीकर पद और उपमुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर तेज हलचल शुरू हो गई है.
पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर नई सत्ता संरचना के मुहाने पर खड़ी है. गुरुवार को सुबह 11 बजे गांधी मैदान में होने वाले शपथ ग्रहण से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तैयारियों का जायजा लिया, वहीं एनडीए के दोनों प्रमुख घटक-जेडी(यू) और बीजेपी-मंत्रालयों के बंटवारे और विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर गहन मंथन में जुटे हैं. समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है.
चुनाव में शानदार जीत के बाद अब असली चुनौती सत्ता के हिस्सों का न्यायपूर्ण बंटवारा है. दिल्ली और पटना में लगातार बैठकों का दौर जारी है, जिसमें विभागों, स्पीकर पद और डिप्टी सीएम की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है. अमित शाह भी बुधवार शाम पटना पहुंचेंगे, जिसके बाद दोनों दलों के बीच विभागीय खाका लगभग तय होने की उम्मीद है.
नीतीश कुमार का इस्तीफा
बिहार विधानसभा चुनाव में NDA बंपर जीत के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई अंतिम कैबिनेट बैठक में विधानसभा भंग करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई. इसी बैठक के बाद नीतीश कुमार सीधे राजभवन पहुंचे और अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया. इसके साथ ही उन्होंने नई सरकार बनाने का दावा भी पेश किया.
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत
हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की, जिसमें भाजपा को 89, जेडी(यू) को 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को चार सीटें मिलीं.
तीन घंटे तक मैराथन बैठक
शपथ ग्रहण समारोह से पहले, जेडी(यू) और बीजेपी दोनों ने कैबिनेट में जगह के मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है. मंगलवार को दिल्ली में शाह की अध्यक्षता में तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जेडी(यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (लल्लन) सिंह समेत दोनों दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, 'बैठक के नतीजे मंगलवार शाम पटना में दूसरे दौर की बैठक के बाद घोषित किए जाएंगे... हालांकि किसी भी मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है, साझेदारों के लिए विभागों के आवंटन और कैबिनेट के लिए उम्मीदवारों के चयन पर चर्चा करना स्वाभाविक है.'
विधायक दल की बैठक कब?
दोनों दलों की विधायक दल की बैठक बुधवार को होगी-जिसमें उपमुख्यमंत्री पद के लिए कौन उम्मीदवार हो सकता है, इस पर संकेत मिल सकते हैं. निवर्तमान सरकार में दो उपमुख्यमंत्री थे -सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, जिनमें से एक पिछड़ा वर्ग के नेता और दूसरे भूमिहार थे और दोनों ही चुनाव जीत गए.
कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या
संवैधानिक रूप से, कैबिनेट मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल क्षमता के 15% तक सीमित है. 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं.
भाजपा पदाधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभागों के बंटवारे पर चर्चा हुई. पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि शाह बुधवार को पटना आकर एक और बैठक करेंगे.
दोनों की नजर गृह मंत्रालय पर
मामले से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि भाजपा और जेडी(यू) दोनों की नजर गृह मंत्रालय पर है, जो पिछले कार्यकाल में जेडी(यू) के पास था. सूत्रों ने बताया कि शिक्षा मंत्रालय, जो जेडी(यू) के पास था, भी विवाद का विषय बना हुआ है.
एक गठबंधन नेता ने बताया कि अध्यक्ष पद दोनों पक्षों के लिए आकर्षक है. ऊपर उद्धृत पदाधिकारी ने कहा, 'व्यापक मुद्दे पहले ही सुलझ चुके हैं...'. इस पद के लिए भाजपा के प्रेम कुमार और जदयू के विजय चौधरी सबसे आगे हैं. निवर्तमान विधानसभा में भाजपा नेता नंद किशोर यादव अध्यक्ष थे, जबकि जदयू के नरेंद्र नारायण यादव उपाध्यक्ष थे.
किसे मिलेगी बिहार उपमुख्यमंत्री की कुर्सी?
केवल एक उपमुख्यमंत्री के सवालों पर पार्टी जवाब देने से बचती नजर आ रही है. खबरों की मानें तो इस मुद्दे पर पटना में होने वाली बैठक में चर्चा की जाएगी, जिसमें प्रतिनिधित्व (लिंग और जाति दोनों) के मुद्दों को ध्यान में रखा जाएगा...
जेडी-यू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा, 'उचित समय पर सब कुछ पता चल जाएगा. विचार-विमर्श चल रहा है और शपथ ग्रहण की तैयारियां जोरों पर हैं.'
बैठक से पहले बड़े बदलाव
भाजपा विधायक दल की बैठक से पहले, भाजपा ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया, जबकि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और वरिष्ठ पार्टी नेता साध्वी निरंजन ज्योति को केंद्रीय सह-पर्यवेक्षक चुना गया.
एनडीए के एक नेता ने बताया कि जेडीयू चाहती है कि अगर भाजपा विधानसभा अध्यक्ष का पद ले लेती है तो केवल एक उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया जाए और वह बिहार में दो उपमुख्यमंत्री के खिलाफ है.