IND vs SA: सुपर-8 में भारत की करारी हार के बाद साउथ अफ्रीका की मजाक उड़ाने वाला विज्ञापन क्यों हटाया गया?
इतने संसाधनों के बावजूद प्रचार का स्तर हल्का क्यों रहा. विदेशी प्रसारक प्रतिद्वंद्विता को इतिहास और सम्मान के साथ पेश करते हैं. वहां विरोधी टीम का मजाक नहीं उड़ाया जाता.
नई दिल्ली: T20 World Cup के सुपर 8 मुकाबले से पहले आधिकारिक प्रसारकों का एक प्रोमो चर्चा में था. इस विज्ञापन को दक्षिण अफ्रीका के पिछले निराशाजनक रिकॉर्ड पर तंज के रूप में देखा जा रहा था. सोशल मीडिया पर इसे लेकर पहले ही बहस छिड़ गई थी. लेकिन अहमदाबाद में खेले गए मैच के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई. भारत को 76 रन से बड़ी हार मिली, जिसके बाद प्रोमो को हटा दिया गया.
यह प्रोमो आत्मविश्वास से अधिक अहंकार का प्रतीक बन गया था. विज्ञापन में यह संदेश छिपा था कि जीत भारत का अधिकार है. मैच ने इस धारणा को तोड़ दिया. दक्षिण अफ्रीका ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया. हार के बाद प्रसारकों की चुप्पी बहुत कुछ कह गई. दर्शकों ने भी सवाल उठाया कि खेल को मजाक में क्यों बदला गया.
Also Read
- T20 World Cup: अफ्रीका के सामने सूर्या सेना धराशायी! खतरे में सेमीफाइनल का सपना, समझे सुपर 4 में पहुंचने का समीकरण
- T20 World Cup: साउथ अफ्रीका से मिली शर्मनाक हार, कप्तान सूर्यकुमार यादव का किस पर फूटा गुस्सा?
- टी20 विश्व कप में जसप्रीत बुमराह ने रचा इतिहास, अश्विन-अर्शदीप को पछाड़कर हासिल की खास उपलब्धि
भारत-अफ्रीका की रोमांचक भिड़ंत
भारत और दक्षिण अफ्रीका की भिड़ंत हमेशा रोमांचक रही है. दोनों टीमों के पास मैच पलटने की क्षमता है. ऐसे मुकाबले को हल्के अंदाज में पेश करना खेल के साथ अन्याय है. खेल अनिश्चितताओं का मंच है. यहां किसी भी दिन परिणाम बदल सकता है. यही इसकी खूबसूरती है और यही संदेश प्रचार में दिखना चाहिए.
अब आत्ममंथन जरूरी है?
अब प्रसारकों के सामने मौका है कि वे अपनी रणनीति बदले. आत्ममंथन जरूरी है. शायद अगला विज्ञापन संयम और आत्मविश्लेषण का हो. खिलाड़ियों को भी समझना होगा कि विश्व कप में केवल जोश नहीं, धैर्य और योजना भी चाहिए. खेल को खेल की तरह ही पेश करना सबसे सुरक्षित और सम्मानजनक रास्ता है.