रणजी में 78 साल बाद बना अनोखा रिकॉर्ड, पुछल्ले बल्लेबाजों ने शतक ठोक बनाया इतिहास

Ranji Trophy: घरेलू क्रिकेट इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब टीम के लिए 10वें और 11वें बल्लेबाज शतकीय पारी खेलें.

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Ranji Trophy: रणजी ट्रॉफी में एक अनोखा रिकॉर्ड सामने आया है. क्वार्टन फाइनल मुकाबले में बड़ौदा के खिलाफ खेलते हुए मुंबई की टीम ने 78 साल बाद अपने रिकॉर्ड को दोहराया है. टीम के दसवें और ग्यारहवें बल्लेबाजों ने शतकीय पारी खेली.

1946 में बना था ऐसा रिकॉर्ड

फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतिहास में 78 साल बाद ऐसा मौका फिर आया है जब टीम के दसवें और ग्यारहवें बल्लेबाजों नें शतक लगया. जहां दसवें नंबर पर खेलते हुए तनुष कोटियन ने नाबाद 120 रन बनाए तो वहीं नंबर 11 पर खेलते हुए तुषार देशपांडे ने 123 रनों की पारी खेली. इसके पहले साल 1946 में इंग्लैंड में सरे काउंटी के खिलाफ भारत की ओर से चंदु सरवटे और शुते बनर्जी ने दसवें नंबर और ग्यारहवें पर बल्लेबाजी करते हुए शतक जमाया था.

तनुष-तुषार की पारी से सेमीफाइनल में पहुंची मुंमई

तनुष और तुषार के शतक के दम पर मुंबई की टीम ने दूसरी पारी में 569 रन बनाते हुए बड़ौदा के सामने 600 रनों की लक्ष्य रखा. जिसके जवाब में बड़ौदा की टीम 121 रन तीन विकेट के नुकसान पर बना सकी. ऐसी स्थिति में मैच तो ड्रॉ हो गया लेकिन मुंबई को पहली पारी में मिली बढ़त को देखते हुए सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर दिया गया.

दोनों के बीच 232 रनों की साझेदारी

पहली पारी में बढ़के के बाद जब दूसरी पारी में टीम खेलने उतरी तो टीम के 9 विकेट 337 रन पर गिर गए थे. जिसके बाद अंतिम विकेट के लिए जहां 232 रनों की साझेदारी हुई. वहीं 10वें और 11वें नंबर के खिलाड़ी तनुष और तुषार ने बेहतरीन शतक जमाया. तनुष ने जहां 129 गेंदों में 10 चौके और 4 छक्के की मदद से नाबाद 120 रन बनाए. जबकि तुषार देशपांडे 129 गेंद में 10 चौके और 8 छक्कों की सहायता से 123 रनों की पारी खेली.