वैभव सूर्यवंशी को लेकर ओलंपिक चैंपियन मनु भाकर से पूछा गया ऐसा सवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस
दिल्ली में शूटिंग समारोह के दौरान मनु भाकर से क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी पर सवाल पूछा गया. मनु ने परिपक्वता दिखाई, लेकिन सोशल मीडिया पर इस क्रिकेट केंद्रित मानसिकता के खिलाफ तीखी बहस छिड़ गई है.
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के 75 साल पूरे होने का भव्य जश्न मनाया जा रहा था. वहां पेरिस ओलंपिक की नायिका मनु भाकर भी मौजूद थीं. उम्मीद थी कि चर्चा उनके ऐतिहासिक दो पदकों और भविष्य की चुनौतियों पर ही केंद्रित रहेगी, लेकिन तभी एक अप्रत्याशित सवाल ने वहां का माहौल पूरी तरह बदल दिया. इस प्रश्न ने भारतीय खेल जगत में खेलों की प्राथमिकता और क्रिकेट के प्रति मीडिया के झुकाव पर एक गंभीर विमर्श शुरू किया
समारोह के बीच एक रिपोर्टर ने मनु भाकर से आईपीएल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर उनकी निजी राय मांग ली. 15 साल के इस युवा क्रिकेटर ने हाल में काफी चर्चा बटोरी है. हालांकि, एक समर्पित शूटिंग इवेंट में ओलंपिक चैंपियन से क्रिकेटर पर टिप्पणी मांगना कई लोगों को बहुत अजीब लगा. यह सवाल न केवल अप्रत्याशित था, बल्कि इसने शूटिंग के मंच पर क्रिकेट के वर्चस्व की याद दिला दी.
मनु का संयमित और शानदार जवाब
अचानक पूछे गए इस सवाल पर मनु भाकर ने जरा भी झुंझलाहट नहीं दिखाई. उन्होंने बेहद शांति और परिपक्वता के साथ कहा कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती. मनु के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी को सही मार्गदर्शन मिले, तो महानता कभी भी हासिल की जा सकती है. उनका यह जवाब खेल भावना का उत्कृष्ट प्रतीक था और इसने उनकी खेलों की गहरी समझ को सबके सामने मजबूती से प्रदर्शित किया.
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
मनु के जवाब की प्रशंसा हुई, लेकिन सवाल पूछने वाले रिपोर्टर को नेटिजन्स ने सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया. खेल प्रेमियों ने कहा कि ओलंपिक चैंपियन के मंच को क्रिकेट के लिए इस्तेमाल करना उनके संघर्ष का अपमान है. जॉय भट्टाचार्य जैसे विशेषज्ञों ने भी इस क्रिकेट केंद्रित मानसिकता की तीखी आलोचना की. यह घटना उस मानसिकता को दर्शाती है जहां हर कहानी सिर्फ क्रिकेट के इर्द-गिर्द ही बुनी जाती है.
क्रिकेट का साया और अन्य खेल
भारत में यह बहस पुरानी है कि क्रिकेट की लोकप्रियता के कारण बाकी खेलों को वह सम्मान नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार हैं. शूटिंग ने भारत को लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलताएं दिलाई हैं, फिर भी समारोह में क्रिकेट का प्रवेश लोगों को बहुत खटक गया. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अन्य खेलों को सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक ओलंपिक नायकों को प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करना पड़ेगा.
लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते कदम
इस विवाद के बीच मनु भाकर का ध्यान अपने असली लक्ष्य से जरा भी नहीं भटका है. वह आगामी एशियाई खेलों और 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए खुद को तैयार कर रही हैं. उनका कहना है कि असली जवाब हमेशा मैदान पर प्रदर्शन के जरिए ही दिया जाता है. मनु की यह एकाग्रता बताती है कि वह शोर से दूर रहकर अपने खेल पर ध्यान देना बहुत अच्छी तरह जानती हैं.