IPL 2026

IPL 2026: CSK vs जडेजा, चेन्नई को धूल चटाने के इरादे से गुवाहाटी में उतरेंगे थलापति; आज जडेजा-संजू की इमोशनल टक्कर

रविंद्र जडेजा एक दशक से भी ज्यादा समय तक सीएसके का हिस्सा थे. सीएसके केवल उनकी टीम ही नहीं बल्कि उनकी पहचान बन गई थी. लेकिन अब सर जडेजा अपनी उसी पहचान यानी की पीली जर्सी में नजर नहीं आएंगे.

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Meenu Singh

गुवाहाटी: आईपीएल का हर सीजन सिर्फ मैचों का नहीं, बल्कि भावनाओं और पहचान के बदलते रंगों का भी होता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलेगा, जब लंबे समय तक एक टीम की पहचान रहे खिलाड़ी नई जर्सी में नजर आएंगे. सबसे ज्यादा ध्यान उस पल पर रहेगा जब रवींद्र जडेजा चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ गुलाबी जर्सी में उतरेंगे. ये एक ऐसा दृश्य होगा जो फैंस के लिए नया और थोड़ा अजीब दोनों होगा. 

यह सीएसके फैंस के लिए आसान नहीं होगा. जडेजा एक दशक से भी ज्यादा समय तक सीएसके का हिस्सा थे. सीएसके केवल उनकी टीम ही नहीं बल्कि उनकी पहचान बन गई थी. लेकिन अब सर जडेजा अपनी उसी पहचान यानी की पीली जर्सी में नजर नहीं आएंगे. इस सीजन के शुरु होने से पहले सीएसके और आरआर के बीच बड़ा ट्रेड हुआ था जिसमें रविंद्र जडेजा और संजू सैमसन का आपस में बदलाव हुआ था. 

जडेजा का नया सफर

चेन्नई के थलापति अब चेन्नई की जीत के लिए नहीं बल्कि आरआर की जीत के लिए खेलेंगे. जडेजा ने चेन्नई के लिए खेलते हुए खुद को एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया, लेकिन अब उनके एक नए सफर की शुरुआत हुई है.

अब वह अपनी पुरानी टीम राजस्थान रॉयल्स के साथ खेलते नजर आएंगे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जडेजा ने अपने करियर की शुरुआत  आरआर के साथ ही की थी और अब वह एक बार फिर से गुलाबी जर्सी में ही नजर आएंगे. 

सैमसन की नई चुनौती

जडेजा के साथ ही विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के लिए भी ये सीजन आसान नहीं होने वाला है क्योंकि वह भी अपनी पुरानी टीम का साथ छोड़ सीएसके मे शामिल हुए हैं. जिसमें उनका सीएसके में आना एक बड़ा बदलाव है.

एमएस धोनी की विरासत वाली टीम में खुद को साबित करना संजू के लिए आसान नहीं होगा, लेकिन उनकी आक्रामक बल्लेबाजी टीम को नई दिशा दे सकती है. साथ ही कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि सीएसके संजू को धोनी के आगे देख रही है. क्योंकि टीम को धोनी के बाद एक ऐसा विकेटकीपर चाहिए जोकि धोनी की ही तरह चौकन्ना और सतर्क रहे. 

फैंस के लिए भावनात्मक पल

आईपीएल की यही खासियत है कि खिलाड़ी और टीम के बीच एक भावनात्मक रिश्ता बन जाता है. जब वही खिलाड़ी दूसरी टीम के लिए खेलते हैं, तो फैंस के लिए अपनी वफादारी तय करना आसान नहीं होता. ऐसा पहले भी कई बार देखने को मिला है. जब कई साल एक ही टीम में बिताने के बाद खिलाड़ी दूसरी टीम में जाते हैं तो वो उनके लिए इतना आसान नहीं होता.

पिछले सीजन भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब लंबे समय से आरसीबी में खेलने के बाद मोहम्मद सिराज गुजरता टाइटंस में शामिल हुए तो उनके यह बिलकुल आसान नहीं था.