IPL 2025: RCB के X पेज से हिंदी-कन्नड़ विवाद!, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के फैंस आपस में क्यों भिड़े?

आरसीबी, जिसके एक्स पर अंग्रेजी और कन्नड़ अकाउंट हैं. रविवार को हिंदी अकाउंट लॉन्च किया. वर्तमान में इसके 2,500 से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं. इसकी पहली पोस्ट में एक वीडियो था जिसमें आरसीबी के दिग्गज क्रिकेटर विराट कोहली ने हिंदी संदेश में फ्रैंचाइजी द्वारा रिटेन किए जाने पर अपनी खुशी साझा की. पोस्ट के कैप्शन में कहा गया है कि आरसीबी के वीडियो अब हिंदी में भी उपलब्ध हैं.

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Gyanendra Sharma

आईपीएल टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु विवादों में फंस गई है. सोशल मीडिया एक्स पर हिंदी अकाउंट लॉन्च करने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. इससे एक बार फिर से हिंदी-कन्नड़ विवाद को हवा मिली है. सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने आईपीएल फ्रैंचाइजी पर कन्नड़ बोलने वालों पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया है. वहीं एक सेक्शन का कहना है आरसीबी के फैंस सिर्फ कर्नाटक में नहीं हैं. बाकी के राज्यों में भी हैं, ऐसे में भाषा को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए. 

आरसीबी, जिसके एक्स पर अंग्रेजी और कन्नड़ अकाउंट हैं. रविवार को हिंदी अकाउंट लॉन्च किया. वर्तमान में इसके 2,500 से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं. इसकी पहली पोस्ट में एक वीडियो था जिसमें आरसीबी के दिग्गज क्रिकेटर विराट कोहली ने हिंदी संदेश में फ्रैंचाइजी द्वारा रिटेन किए जाने पर अपनी खुशी साझा की. पोस्ट के कैप्शन में कहा गया है कि आरसीबी के वीडियो अब हिंदी में भी उपलब्ध हैं.

हिंदी हैंडल लॉन्च करने पर विवाद

कमेंट सेक्शन में कई यूज़र्स ने हिंदी हैंडल लॉन्च करने के लिए आईपीएल फ़्रैंचाइजी की आलोचना की. जबकि कुछ ने कहा कि इसने कन्नड़ संस्कृति का अपमान किया है, दूसरों ने आरसीबी को उत्तर भारत में जाने के लिए कहा. कुछ यूजर्स ने कहा कि आरसीबी को अपने नाम से बेंगलुरु हटा देना चाहिए, जबकि अन्य ने सवाल किया कि हिंदी अकाउंट की क्या जरूरत है.

हालांकि, प्रशंसकों के एक अन्य वर्ग ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि कुछ लोग प्रशंसकों को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ लोगों ने कहा कि देश भर में हिंदी का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और यह कदम आरसीबी को हिंदी भाषी प्रशंसकों के करीब लाता है.

कर्नाटक में भाषा विवाद

आरसीबी के खिलाफ नफरत कर्नाटक में चल रहे भाषा विवाद में नया है, जहां स्थानीय कन्नड़ भाषी हिंदी थोपने के प्रयासों का विरोध कर रहे हैं. दूसरी ओर, हिंदी भाषी लोगों ने बेंगलुरु में भाषाई उत्पीड़न की शिकायत की है, कई सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि ऑटो-रिक्शा चालक उनसे कन्नड़ में बात करने पर जोर देते हैं. इस साल की शुरुआत में, बेंगलुरु नागरिक निकाय ने सभी दुकानदारों से कहा था कि वे सुनिश्चित करें कि साइनबोर्ड में कम से कम 60 प्रतिशत कन्नड़ भाषा हो. कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने कई दुकानों को निशाना बनाया, जिससे सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैल गया.