1-1 से मैच हुआ बराबर फिर कैसे हार गईं रितिका हुड्डा? अब ऐसे मिलेगा ब्रॉन्ज मेडल जीतने का मौका
Reetika Hooda: 76 किलोग्राम वेट कैटेगरी में भारत की पहलावन रीतिका हुड्डा को क्वार्टरफाइनल में हार का सामना करना पड़ा. इस हार के साथ उनका सेमीफाइनल में जाने का सपना टूट गया. हालांकि, अभी भी उन्हें ब्रॉन्ज मैच खेलने का मौका मिल सकता है. ये मौका तभी मिलेगा जब उनको हराने वाली पहलवान फाइनल में पहुंचेंगी.
Reetika Hooda: पेरिस ओलंपिक में भारत की पहलवान रीतिका हुड्डा 76 किलोग्राम वेट कैटेगरी में क्वार्टरफाइनल हार गईं. सवाल ये है कि ये मुकाबला 1-1 से बराबरी पर खत्म हुआ तो आखिर रेफरी ने किर्गिस्तान की पहलवान को क्यों विजेता घोषित कर दिया? दरअसल, आखिरी अंक हासिल करने की वजह से रेफरी ने विरोधी पहलवान को विजेता घोषित कर दिया. अगर यही आखिरी अंक रीतिका हासिल कर पातीं तो उन्हें विजेता घोषित कर दिया जाता. इस हार के साथ रीतिका का फाइनल में पहुंंचकर गोल्ड जीतने का सपना टूट गया लेकिन अभी भी उन्हें ब्रान्ज खेलने का मौका मिला सकता है.
रीतिका ने प्री क्वार्टर फाइनल में हगंरी की पहलावन को 12-2 के अंतर से हराया था. हालांकि, क्वार्टरफाइनल में लक ने साथ नहीं दिया. लेकिन रीतिका को मेडल जीतेन का मौका मिल सकता है. आइए जानते हैं कैसे?
ऐसे मिलेगा रीतिका को ब्रॉन्ज मेडल जीतने का मौका
किर्गिस्तान की पहलावन से भारत की पहलवान रीतिका को 57 किलोग्राम कैटेगरी में हार का सामना करना पड़ा. अगर किर्गिस्तान की पहलवान आयपेरी मेदेत किजी फाइनल में पहुंच जाती हैं तो भारत की रीतिका को मौका रेपचेज के तहत ब्रॉन्ज मेडल खेलने का मौका मिलेगा.
कुश्ति में रेपचेप एक ऐसी प्रक्रिया जो क्वार्टरफाइनल में हार का सामने करने वाले पहलावन को ब्रान्ज मेडल जीतने का मौका देती है. अगर आयपेरी मेदेत किजी जिन्होंने रीतिका को क्वार्टरफाइनल में हराया वह फाइनल में पहुंचती है तो रीतिका को आगे खेलने का मौका मिल सकता है.
यानी अभी भी हिंदुस्तान को मेडल मिल सकता है. बसर्ते आयपेरी मेदेत किजी फाइनल में पहुंचती हैं तो. रीतिका के घर में खुशी का माहौल था. बेटी ने जब प्री क्वार्टरफाइनल मुकाबला जीता तो घर वालों में खुशी की लहर दौड़ गई.
9 साल की उम्र में शुरू की थी कुश्ती
रीतिका हुड्डा हरियाणा के रोहतक जिले के खरकड़ा गांव से संबंध रखती हैं. रीतिका के पिता का नाम जगबीर हु्डा है. वह पेशे से एक किसान हैं. 9 साल की उम्र से रीतिका ने कुश्ती की दुनिया में कदम रखा था. पेरिस ओलंपिक के लिए सिलेक्ट होने के बाद भारतीय पहलवान ने कहा था कि जब उनका सिलेक्शन कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में नहीं हुआ तो उन्होंने कुश्ती छोड़ने का फैसला कर लिया था. लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह देते हुए उन्हें प्रेरित किया तब जाकर उन्होंने अपना फैसला बदला.