पिता फौजी, दादा किसान... ध्रुव जुरेल ने शतक के बाद क्यों दिखाया ‘जय जवान, जय किसान’?

कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने नाबाद 115 रन बनाकर दूसरा टेस्ट शतक जड़ा. शतक के बाद उनका सलाम और ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू चर्चा में आया. अब उनके इस टैटू के पीछे की कहानी का खुलासा हो गया है.

X (@BCCI)
Meenu Singh

श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने नाबाद 115 रन की पारी खेलकर अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक पूरा किया. हालांकि, जुरेल की बल्लेबाजी से ज्यादा उनका शतक के बाद वाला सेलिब्रेशन चर्चा में रहा. जुरेल ने अपना शतक पूरा करने के बाद पहले तो सलाम किया फिर अपनी बाजू पर बना ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू दिखाया.

फिर क्या था उनका ये सेलिब्रेशन और टैटू चर्चा में आ गया. अब फैंस ये जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिरी जुरेल ने ऐसा सेलिब्रेशन क्यों किया. तो बता दें ध्रुव जुरेल के इस टैटू के पीछे एक बहुत ही भावुक कहानी जुड़ी हुई है. 

क्यों खास है टैटू? 

मैच के बाद जब प्रेस कॉन्फ्रेंस में जुरेल से इस टैटू और उनके सेलिब्रेशन के बारे में पूछा या तब उन्होंने बताया कि उनके दादा किसान थे और पिता सेना में. इसी वजह से उन्होंने अपने बाइसेप्स पर ‘जय जवान, जय किसान’ लिखवाया है. 


शतक के बाद किया गया सलाम भी उन्होंने दोनों को समर्पित किया. जुरेल के लिए यह टैटू सिर्फ एक मैसेज नहीं, बल्कि उनकी पारिवारिक जड़ों की पहचान है. कोलंबो में खेली गई 115 रन की पारी उनके टेस्ट करियर का दूसरा शतक भी रही.

99 रन पर बढ़ी धड़कन, डाइव लगाकर पूरा किया शतक

जुरेल 99 रन तक आराम से पहुंचे, लेकिन इसके बाद श्रीलंकाई गेंदबाज असिथा फर्नांडो ने दबाव बढ़ाया. फील्डिंग भी काफी सख्त कर दी गई. एक गेंद पर जुरेल ने सीधा शॉट खेला और रन के लिए दौड़ पड़े. फील्डर को तेजी से पास आता देख उन्होंने पूरी ताकत से डाइव लगाई और शतक पूरा किया. यह पल उनके लिए रोमांच और तनाव दोनों से भरा रहा.

पंत के साथ साझेदारी, लेकिन अंदाज अपना

ऋषभ पंत के साथ जुरेल ने 112 रन की साझेदारी की. पंत ने 63 रन बनाए, जबकि जुरेल ने धैर्य के साथ अपनी पारी आगे बढ़ाई. जुरेल ने कहा कि पंत के अनुभव से उन्हें काफी मदद मिलती है और वह बल्लेबाजी के दौरान उनसे सलाह लेते रहते हैं. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह पंत की तरह खेलने की कोशिश नहीं करते. उनके मुताबिक, हर बल्लेबाज का अपना स्वाभाविक अंदाज होता है.