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पेरिस में भारत की 2 बेटियों ने रचा इतिहास, पैरालंपिक में अवनि ने गोल्ड तो मोना ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

Avani Lekhara; पेरिस पैरालंपिक में भारत की अवनि लेखरा ने गोल्ड मेडल जीत लिया है. उनके साथ मोना अग्रवाल ने ब्रान्ज मेडल अपने नाम किया. भारत के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं.

@IDL
India Daily Live

Avani Lekhara: पेरिस ओलंपिक में भारत की धमाकेदार शुरुआत हुई है. अवनि लेखरा ने 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग में गोल्ड मेडल जीता तो वहीं, मोना अग्रवाल ने इसी मुकाबले में ब्रान्ज मेडल जीता है. इससे अच्छी भारत की शुरुआत हो ही नहीं सकती है. पैरालंपिक में भारत ने शानदार शुरुआत की है.  अवनि पैरा ओलंपिक खेलों में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतयी पैरा एथलीट बन गई हैं. 

पैरा शूटर अवनि लेखरा ने शुक्रवार को पैरालिंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया. टोक्यो पैरालंपिक में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 स्पर्धा में भी अवनि ने गोल्ड जीता था. उन्होंने 249.7 अंकों का नया पैरालिंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए शानदार अंदाज में अपना दूसरा स्वर्ण पदक जीता. अवनि ने टोक्यो में 249.6 का पिछला रिकॉर्ड बनाया था. 22 वर्षीय अवनि भाला फेंक खिलाड़ी देवेंद्र झाझरिया के बाद दो स्वर्ण पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय पैरालिंपियन हैं.

राजस्थान में हुआ था अवनि का जन्म

पेरिस पैरालंपिक में राइफल शूटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली अवनी लेखरा का जन्म 8 नवंबर 2001 को जयपुर में हुआ था. उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड मेडल जीता था और 50 मीटर में ब्रान्ज मेडल जीता था. वह भारत की बेहतरीन शूटर्स में से एक हैं. 

2012 में हुआ एक्सीडेंट

अवनी लेखरा पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतयी महिला एथिलीट हैं.  साल 2012 में उनका कार एक्सीडेंट हुआ था. इसके बाद वह पैराप्लेजिया से पीड़ित हो गईं थी. इसके बाद उनके पिता ने तीरंदाजी में जाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया. 

वह वर्तमान में राजस्थान विश्वविद्यालय, भारत में कानून की पढ़ाई कर रही है. वह केंद्रीय विद्यालय 3 (जयपुर) की छात्रा थी, जहां से उन्होंने शूटिंग के क्षेत्रीय मैच में अपना पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया था. 

संघर्षों से भरी रही मोना अग्रवाल की कहानी 

37 वर्षीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग  में भाग लेने और ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद मोना अब 50 मीटर राइफल प्रोन आर6 स्पर्धा और महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन आर8 स्पर्धा में हिस्सा लेंगी. 

व्हीलचेयर पर बैठकर मोना ने जीत ली दुनिया

मोना अग्रवाल की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणादायी हो सकती है. उनका जन्म राजस्थान के सीकर में हुआ था. उनका पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा है. पोलियो की बीमारी के चलते बचपन से ही वह चलफिर नहीं सकती थी. व्हीलचेयर में बैठकर ही उन्होंने दुनिया को फतह करने का काम किया है. पैराशूटर बनने के लिए मोना सीकर से जयपुर शिफ्ट हो गईं थी. 2021 में मोना अग्रवाल ने पैरा शूटिंग की दुनिया में कदम रखा और कड़ी मेहनत के दम पर पैरालंपिक तक का सफर तय करके और देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. 

इन पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं अवनी लेखरा

2021  में उन्हें खेल रत्न पुरस्कार, भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान मिला था. 
2021  में उन्हें  यंग इंडियन ऑफ द ईयर - जीक्यू इंडिया पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 
2021  में उन्हें वोग वूमन ऑफ द ईयर - वोग मैगज़ीन
2021 - बेस्ट फीमेल डेब्यू - पैरालंपिक अवार्ड्स - इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी
2022 में अवनी लेखरा को पद्म श्री सम्मानित किया गया था. 
2022 - खेलों में उत्कृष्टता के लिए फिक्की एफएलओ अवार्ड
2022 - हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा शी - एज अवार्ड
2022 - पैरा एथलीट ऑफ द ईयर (महिला) - स्पोर्टस्टार
2022 - बीबीसी इंडिया चेंज मेकर ऑफ द ईयर 2021
2022 - ब्रिक्स सीसीआई डब्ल्यूई - ट्रेलब्लेज़र 2022