टैक्स बकायेदारों पर 'डिजिटल स्ट्राइक'! 3 साल में 470% बढ़ा डिफॉल्ट; 10 साल पुराने मामलों में 15,000% की बढ़ोतरी
भारत में पिछले तीन वर्षों में टैक्स डिफॉल्ट के मामलों में 470% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ₹20 लाख करोड़ की राशि वर्तमान में बकाया है. आयकर विभाग अब तकनीक और सख्त नियमों के जरिए डिफॉल्टर्स पर नकेल कस रहा है.
नई दिल्ली: भारतीय राजस्व विभाग के सामने कर वसूली को लेकर एक अभूतपूर्व आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है. हालिया आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में टैक्स डिफॉल्ट के मामलों में 470% की चौंकाने वाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2025 तक बकाया टैक्स की मांग ₹20 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है. यह संकट न केवल नए करदाताओं से जुड़ा है, बल्कि तकनीक के बढ़ते हस्तक्षेप ने दशकों पुराने अनसुलझे कर मामलों को भी पूरी तरह उजागर कर दिया है.
टैक्स डिफॉल्ट की इस व्यापक लहर का नेतृत्व मुख्य रूप से व्यक्तिगत करदाता, अविभाजित हिंदू परिवार (HUF) और ट्रस्ट कर रहे हैं. आंकड़ों की मानें तो इस श्रेणी में बकाया राशि ₹25,396 करोड़ से बढ़कर ₹20 लाख करोड़ हो गई है, जो लगभग 783% की वृद्धि है. विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन डिफॉल्टर्स के पास या तो कुर्क करने लायक संपत्ति नहीं है या वे पूरी तरह फरार हो चुके हैं. यह स्थिति सरकारी खजाने के लिए बड़ी बाधा है.
तकनीकी जांच से उजागर हुआ पुराना बकाया
आयकर विभाग द्वारा उन्नत तकनीकी उपकरणों का उपयोग कर रहा है, जिससे 10 साल से अधिक पुराने मामलों में 15,144% की वृद्धि देखी गई है. पुराने लेन-देन जो पहले छिपे हुए थे, अब डेटा माइनिंग के जरिए विभाग की रडार पर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ₹1.5 लाख करोड़ की पुरानी मांगें अब वसूली के लिए चिन्हित की गई हैं. 5 से 10 साल पुरानी कर मांगों में भी 4,000% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो विभाग की तकनीकी पारदर्शिता का ही परिणाम है.
कॉर्पोरेट जगत और आईबीसी का कानूनी पेच
कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी टैक्स न चुकाने की प्रवृत्ति 263% बढ़ी है, जो अब ₹7.3 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है. कर विशेषज्ञों का मानना है कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की प्रक्रियाओं के कारण यह बड़ी राशि अटकी हुई है. जब कोई कंपनी दिवालिया होने की प्रक्रिया में होती है, तो वहां टैक्स वसूली पर कानूनी रोक लग जाती है. समाधान के बाद भी कर बकाया को भुगतान की प्राथमिकता सूची में अक्सर सबसे नीचे रखा जाता है.
अमीरों की विदेशी संपत्तियों पर पैनी नजर
आयकर विभाग ने अब उन रसूखदार व्यक्तियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है जिन्होंने अपनी विदेशी संपत्तियों का विवरण नहीं दिया है. विभाग की 'नज' (Nudge) पहल के तहत ऐसे धनवान लोगों को लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं. इसके साथ ही, जुलाई 2025 में आयकर फॉर्म में किए गए बदलावों ने लाभांश और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसी बारीक जानकारियों को अनिवार्य बना दिया है. इसका मुख्य उद्देश्य कर चोरी के हर संभव रास्ते को भविष्य में पूरी तरह बंद करना है.