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निपाह वायरस: हल्के फ्लू के बाद भी हो सकता है जानलेवा साबित, खराब मौसम में जान लें इसके लक्षण

निपाह वायरस एक दुर्लभ लेकिन बेहद घातक संक्रमण है, जो सामान्य वायरल बुखार जैसा दिखकर अचानक जानलेवा रूप ले सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक है और यह सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करता है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण के मामले बढ़ना आम बात है. हल्का बुखार, सिरदर्द और थकान को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन निपाह वायरस के मामले में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है. निपाह वायरस एक ऐसा संक्रमण है, जो बिना किसी चेतावनी के गंभीर रूप ले सकता है.

शुरुआती लक्षण भले ही सामान्य लगें, लेकिन इसके असर बहुत खतरनाक हो सकते हैं. इसी वजह से खराब मौसम में इसके लक्षणों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है.

सामान्य फ्लू जैसा दिखने वाला खतरनाक वायरस

निपाह वायरस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं. बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और उल्टी जैसी शिकायतें आम वायरल संक्रमण से मिलती-जुलती हैं. इसी कारण लोग इसे हल्के में ले लेते हैं. लेकिन कुछ ही समय में यह संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है और मरीज की हालत बिगड़ सकती है.

मस्तिष्क पर पड़ता है सीधा असर

यह वायरस शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है. निपाह वायरस के कारण एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन की स्थिति बन सकती है. इसके चलते भ्रम, बेहोशी, दौरे और चेतना में बदलाव जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. मस्तिष्क पर असर होने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते हैं, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.

खराब मौसम में क्यों बढ़ता है खतरा

खराब मौसम और नमी के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. ऐसे में वायरस संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है. निपाह वायरस के मामलों में भी यही देखा गया है कि मौसम के उतार-चढ़ाव के दौरान सावधानी और सतर्कता और ज्यादा जरूरी हो जाती है. छोटी सी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है.

इंसानों में फैलने की क्षमता

निपाह वायरस सिर्फ संक्रमित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता. यह शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. खासतौर पर घरों और अस्पतालों में इसका जोखिम ज्यादा रहता है. इसी कारण संदिग्ध मामलों में अलगाव और साफ-सफाई के कड़े उपाय जरूरी माने जाते हैं.

इलाज सीमित, बचाव ही सबसे कारगर

निपाह वायरस के लिए फिलहाल कोई निश्चित दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इलाज मुख्य रूप से मरीज की स्थिति को संभालने पर आधारित होता है. ऐसे में बचाव, जागरूकता और शुरुआती लक्षणों की पहचान ही सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं. समय रहते सावधानी बरतने से जान बचाई जा सकती है.

Disclaimer यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.