भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप्स पर महिलाओं की संख्या में 148% का उछाल, आखिर क्यों शादी से खुश नहीं आज की महिलाएं?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते. 2025-2026 के ग्लीडन और आईपीएसओएस सर्वे के अनुसार 33 प्रतिशत लोग समय की कमी महसूस करते हैं. नौकरी की दौड़, परिवार की जिम्मेदारियों और घरेलू दबाव के बीच इमोशनल जुड़ाव कम हो जाता है. कई लोग भावनात्मक अकेलेपन की शिकायत करते हैं.
एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप ग्लीडन ने भारत में एक चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है. इस प्लेटफॉर्म पर कुल यूजर्स की संख्या अब 40 लाख से ज्यादा हो चुकी है. सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है महिलाओं की संख्या में 148 प्रतिशत का भारी उछाल. पिछले दो सालों में महिलाओं के साइन-अप में इतनी बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है.
शादी पर से उठ सकता है मर्दों का भरोसा!
ऐप के मुताबिक कुल यूजर्स में 65 प्रतिशत पुरुष हैं जबकि 35 प्रतिशत महिलाएं. ज्यादातर यूजर्स पहले से शादीशुदा या लंबे रिश्ते में हैं. बेंगलुरु इस ऐप का सबसे बड़ा शहर बनकर उभरा है, जहां 18 प्रतिशत यूजर्स हैं. उसके बाद हैदराबाद (17 प्रतिशत), दिल्ली (11 प्रतिशत), मुंबई (9 प्रतिशत) और पुणे (7 प्रतिशत) का नंबर आता है. टियर-२ शहरों जैसे लखनऊ, गुवाहाटी और भुवनेश्वर में भी इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है.
महिलाएं क्यों जुड़ रही हैं इस ऐप से?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते. 2025-2026 के ग्लीडन और आईपीएसओएस सर्वे के अनुसार 33 प्रतिशत लोग समय की कमी महसूस करते हैं. नौकरी की दौड़, परिवार की जिम्मेदारियों और घरेलू दबाव के बीच इमोशनल जुड़ाव कम हो जाता है. कई लोग भावनात्मक अकेलेपन की शिकायत करते हैं. ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर थोड़ी रोमांच, समझ या राहत की तलाश शुरू हो जाती है.
यूजर्स रोजाना औसतन 60 से 90 मिनट चैटिंग में बिताते हैं. लंच ब्रेक और आधी रात के समय ऐप पर सबसे ज्यादा एक्टिविटी रहती है. इससे पता चलता है कि लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या में भी चुपके से ये कनेक्शन बनाए रखते हैं. जेंडर स्टिरियोटाइप टूट रहा है. पहले यह माना जाता था कि एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स में केवल पुरुष ही शामिल होते हैं. लेकिन अब यह धारणा बदल रही है.
डेटा दिखाते हैं कि लगभग 43 प्रतिशत पुरुष और 42 प्रतिशत महिलाएं बाहर के भावनात्मक या शारीरिक रिश्तों को स्वीकार करती हैं. महिलाएं अब खुद फैसले ले रही हैं. वे मुख्य रिश्ते में स्थिरता और सुरक्षा चाहती हैं, लेकिन रोमांच और भावनात्मक संतुष्टि कहीं और ढूंढ रही हैं.
सोशल मीडिया और आसान कनेक्टिविटी का असर
सोशल मीडिया और इंटरनेट की आसानी ने बाहर के रिश्ते बनाने का रास्ता और सरल बना दिया है. 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग ऑनलाइन फ्लर्टिंग की आसानी को विश्वासघात बढ़ने का बड़ा कारण मानते हैं. ये ऐप्स गोपनीयता देते हैं, जिससे लोग बिना किसी डर के अपनी जरूरतें व्यक्त कर पाते हैं. भारत में शादी को अभी भी पवित्र और आजीवन बंधन माना जाता है. भव्य विवाहों की परंपरा कायम है. लेकिन व्यस्त जीवनशैली, आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत खुशी की तलाश रिश्तों के पुराने नियमों को चुनौती दे रही है.