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आंखों की रोशनी छीन सकती है बिना सलाह वाली आई ड्रॉप्स! जानें क्या आप भी करते हैं ये गलती?

आंखों की हर समस्या का कारण अलग-अलग होता है. कभी ये एलर्जी की वजह से हो सकती है, तो कभी बैक्टीरिया या वायरस से इंफेक्शन, सूखी आंखों (ड्राई आई) की शिकायत या फिर ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी. बिना जांच के दवा इस्तेमाल करने से असली कारण पता नहीं चलता और सही इलाज में देरी हो जाती है.

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आजकल स्क्रीन पर घंटों काम करना, मोबाइल गेम खेलना या लगातार लैपटॉप देखना आम बात हो गई है. इससे आंखें लाल हो जाना, जलन होना, सूखापन महसूस होना या थकान जैसी समस्याएं अक्सर हो जाती हैं. कई लोग तुरंत मेडिकल स्टोर पर जाकर कोई भी आई ड्रॉप खरीद लेते हैं और बिना सोचे-समझे आंखों में डाल लेते हैं. लगता है छोटी-मोटी समस्या का आसान इलाज है, लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि ये आदत आपकी आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे छीन सकती है.

आंखों की रोशनी छीन सकती है आई ड्रॉप्स! 

आंखों की हर समस्या का कारण अलग-अलग होता है. कभी ये एलर्जी की वजह से हो सकती है, तो कभी बैक्टीरिया या वायरस से इंफेक्शन, सूखी आंखों (ड्राई आई) की शिकायत या फिर ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी. बिना जांच के दवा इस्तेमाल करने से असली कारण पता नहीं चलता और सही इलाज में देरी हो जाती है. कई बार गलत ड्रॉप्स समस्या को छुपा देती हैं, लेकिन अंदर ही अंदर नुकसान बढ़ाती रहती हैं.

जानें आप कहां कर रहे गलती?

खासतौर पर स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप्स सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं. ये लालिमा और सूजन में तुरंत राहत देती हैं, इसलिए लोग इन्हें बार-बार इस्तेमाल कर लेते हैं. लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से आंखों का प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे ग्लूकोमा हो जाता है. ग्लूकोमा में ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है और धीरे-धीरे रोशनी कम होने लगती है. इसके अलावा स्टेरॉयड से मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसमें आंख का लेंस धुंधला हो जाता है.

एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स का गलत इस्तेमाल भी समस्या खड़ी कर सकता है. अगर इंफेक्शन वायरल है तो एंटीबायोटिक काम नहीं करेगी, बल्कि बैक्टीरिया को और मजबूत बना सकती है. कुछ लोग रेडनेस कम करने वाली ड्रॉप्स को आदत बना लेते हैं, लेकिन ये आंखों की नसों को प्रभावित कर सकती हैं और लंबे समय में आंखें और ज्यादा लाल होने लगती हैं. 

तो कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है? 

अगर आंखों में तेज दर्द हो, रोशनी चुभने लगे, धुंधला दिखाई दे, अचानक रोशनी कम हो या फिर 2-3 दिन में समस्या ठीक न हो तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से मिलें. चोट लगने पर या आंख से पानी ज्यादा आने पर भी देरी न करें. हल्की समस्या में ठंडे पानी से सिकाई या कुछ देर आराम करना बेहतर विकल्प हो सकता है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आंखों की कोई भी दिक्कत हो तो खुद से दवा न लें. डॉक्टर जांच कर सही कारण पता लगाते हैं और उसी हिसाब से सुरक्षित इलाज देते हैं.