अब बेफिक्र होकर खाइए चावल, आ गया 3 गुना एक्स्ट्रा प्रोटीन वाला डिजाइनर राइस; डायबिटीज से भी करेगा आपका बचाव

भारत में डायबिटीज और खाने में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए एक खास तरह का डिजाइनर चावल तैयार हो गया है...

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Ashutosh Rai

भारत में डायबिटीज और कुपोषण की दोहरी मार झेल रहे लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. तिरुवनंतपुरम स्थित सीएसआईआर-एनआईआईएसटी (CSIR-NIIST) के वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का डिजाइनर चावल तैयार किया है, जिसमें सामान्य चावल की तुलना में तीन गुना ज़्यादा प्रोटीन है. यह इनोवेशन देश में लोगों की खान-पान की आदतों को बदले बिना ही ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और हिडन हंगर को मिटाने में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है.

सफेद चावल से छुटकारा

भारत में सफेद चावल मुख्य भोजन है, लेकिन इसमें स्टार्च की मात्रा अधिक और प्रोटीन व फाइबर कम होता है. डायबिटीज के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण है. इस नई किस्म के चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 55 से भी कम है, जिससे शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अचानक नहीं बढ़ता. इसके अलावा, जहां आम चावल में केवल 6-8 प्रतिशत प्रोटीन होता है, वहीं इस डिजाइनर चावल में 20 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन मौजूद है.

प्रोटीन की कमी

भारत में प्रोटीन की कमी एक गंभीर और आम समस्या है, जिससे इनकम चाहे जो भी हो, 70-80% से ज्यादा आबादी प्रभावित है. लोग ज्यादतर अनाज (चावल/गेहूं) पर निर्भर हैं और दालें, डेयरी या जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन की कमी है. इसकी मुख्य वजहों में न्यूट्रिशन की जरूरतों के बारे में कम जानकारी, प्रोटीन वाली खाने की चीज़ों की ज़्यादा कीमत और कई लोगों के लिए शाकाहारी खाना शामिल है.

ऐसे बनाया ये चावल

सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के निदेशक डॉ. सी आनंदरामकृष्णन के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट को फूड आर्किटेक्चर तकनीक के जरिए पूरा किया गया है. सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई जेनेटिक मॉडिफिकेशन (GM) नहीं किया गया है. वैज्ञानिकों ने चावल मिलों से निकलने वाले सस्ते टूटे हुए चावल को पीसकर उसमें अतिरिक्त प्रोटीन और आयरन, फोलिक एसिड व विटामिन B12 जैसे जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलाए हैं. इस मिश्रण को वापस से प्रोसेस करके सामान्य चावल का आकार दिया गया है, जिसका स्वाद, बनावट और पकने का तरीका बिल्कुल आम चावल जैसा ही है.

युवाओं में बढ़ता डायबिटीज का खतरा

भारत में डायबिटीज की महामारी तेजी से बढ़ रही है, और अनुमान है कि 77 से 90 मिलियन से ज़्यादा लोग टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित हैं और 25 मिलियन लोग पहले से डायबिटीज से पीड़ित हैं. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश, जिसे अक्सर डायबिटीज कैपिटल कहा जाता है, में 50% से ज्यादा मामलों का पता ही नहीं चलता. यह बीमारी, लाइफस्टाइल, शहरीकरण और जेनेटिक वजहों से होती है और युवा आबादी में दिख रही है और मौत का एक बड़ा कारण है.

न्यूट्रिशनल क्वालिटी में सुधार

क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट निधि रस्तोगी के अनुसार, यह हाई-प्रोटीन चावल भारत जैसे देशों के लिए एक बड़ी कामयाबी है. यह पूरे देश में बड़े पैमाने पर खाई जाने वाली चीज की न्यूट्रिशनल क्वालिटी को सुधारता है. इस इनोवेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों को स्वस्थ रहने के लिए क्विनोआ जैसे महंगे और विदेशी अनाजों की ओर रुख करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे अपना रोजमर्रा का चावल खाकर भी भरपूर पोषण पा सकेंगे.

स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद 

लैब से निकालकर इसे आम जनता की थाली तक पहुंचाने के लिए इस तकनीक को कमर्शियल प्रोडक्शन के लिए टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को सौंप दिया गया है. यह कदम न केवल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि सस्ते टूटे हुए चावल का सही इस्तेमाल करके कृषि क्षेत्र में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने और खाने की बर्बादी को रोकने में भी मदद करेगा. केरल की लैब से शुरू हुआ यह डिजाइनर चावल जल्द ही हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा बन सकता है, जो स्वाद के साथ-साथ पब्लिक हेल्थ को भी मज़बूत करेगा.