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खूबसूरती का बदला पैमाना, विदेशों में सांवला दिखने के लिए लाखों खर्च कर रहे लोग, जानें इसकी वजह

भारत में जहां गोरा दिखने की चाहत अब भी प्रचलित है, वहीं अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में टैन या सांवली त्वचा का चलन तेजी से बढ़ रहा है. चलिए जानते हैं क्या है इसकी वजह.

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Km Jaya

नई दिल्ली: दुनिया भर में खूबसूरती के मानक समय और समाज के अनुसार बदलते रहते हैं. जहां भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग गोरा दिखने की इच्छा रखते हैं, वहीं अमेरिका और कई पश्चिमी देशों में सांवली या टैन त्वचा को आकर्षक माना जा रहा है. यही वजह है कि वहां लोग अपनी त्वचा को गहरा और सुनहरा दिखाने के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च कर रहे हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी देशों में टैनिंग केवल एक फैशन ट्रेंड नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है. गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में लोग धूप में समय बिताते हैं या विशेष टैनिंग सैलून का सहारा लेते हैं. इन सैलून में विभिन्न तकनीकों और कॉस्मेटिक उत्पादों की मदद से त्वचा को टैन लुक दिया जाता है.

क्यों है इतना खास?

अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में टैन स्किन को फिटनेस, सक्रिय जीवनशैली और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है. कई लोगों का मानना है कि हल्का ब्रॉन्ज या सुनहरा रंग चेहरे और शरीर को अधिक आकर्षक बनाता है. इसी कारण सोशल मीडिया पर भी टैन लुक से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो बड़ी संख्या में साझा किए जाते हैं.

रिपोर्ट्स में क्या आया सामने?

रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ देशों में सांवला या टैन लुक अमीरी और लग्जरी लाइफस्टाइल से भी जोड़ा जाता है. छुट्टियां बिताने, समुद्र तटों पर समय गुजारने और आउटडोर गतिविधियों में भाग लेने वालों की त्वचा अक्सर टैन हो जाती है. धीरे-धीरे यह लुक फैशन का हिस्सा बन गया. इसी वजह से कई लोग कृत्रिम टैनिंग सेवाओं पर भारी खर्च करने लगे हैं.

किस-किस फिल्ड में है इसका ट्रेंड?

फैशन और मनोरंजन उद्योग ने भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है. हॉलीवुड और सोशल मीडिया की कई मशहूर हस्तियों ने टैन लुक को लोकप्रिय बनाया है. इसके बाद युवाओं के बीच भी यह ट्रेंड तेजी से फैलने लगा. इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर टैनिंग और ब्रॉन्ज ग्लो से जुड़े लाखों पोस्ट मौजूद हैं.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों क्या दी है सलाह?

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस ट्रेंड को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि अत्यधिक धूप में रहने या बार-बार टैनिंग प्रक्रियाओं का उपयोग करने से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है. लंबे समय तक ऐसा करने से त्वचा संबंधी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड इस बात को दर्शाता है कि सुंदरता की परिभाषा हर समाज और संस्कृति में अलग हो सकती है. जहां एक ओर कुछ देशों में गोरी त्वचा को महत्व दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर कई देशों में सांवली और टैन त्वचा को आधुनिक सौंदर्य का प्रतीक माना जा रहा है. समय के साथ ये मानक लगातार बदलते रहते हैं.