कब्ज की दुश्मन है कॉफी, सुबह फ्रेश होने की समस्या जड़ से कर देगी खत्म
एक नई स्टडी के अनुसार, रोजाना 1 से 3 कप कॉफी पीने वाले लोगों में कब्ज की संभावना 20–40% तक कम होती है. रिसर्च में पाया गया कि कैफीन पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाता है.
नई दिल्ली: ज्यादातर लोगों के लिए कॉफी दिन की शुरुआत करने का सबसे पसंदीदा तरीका है, जो दिमाग को जगाती और ऊर्जा देती है. लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च बताती है कि कॉफी सिर्फ दिमाग नहीं, बल्कि पेट के लिए भी फायदेमंद है खासतौर पर कब्ज से राहत देने में.
एक स्टड़ी अध्ययन के मुताबिक, जो लोग रोजाना अधिक कैफीन का सेवन करते हैं, उनमें कब्ज की संभावना 20 से 40 प्रतिशत तक कम होती है. इस अध्ययन में 13,000 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया था और पाया गया कि रोजाना 1 से 3 कप कॉफी पीने वाले लोगों की आंतें ज्यादा नियमित रूप से काम करती हैं, खासकर युवा और मिड-एज ग्रुप में.
कॉफी पीने से क्या होता है?
दरअसल, कैफीन सिर्फ दिमाग के लिए नहीं, बल्कि पाचन तंत्र के लिए भी नेचुरल स्टिमुलें है. कॉफी पीने के बाद यह बड़ी आंत (colon) में हलचल बढ़ाती है, जिसे peristalsis कहा जाता है. यह प्रक्रिया मल को बाहर निकालने में मदद करती है. रिसर्च में पाया गया कि कैफिनेटेड कॉफी का असर पानी या डिकैफ कॉफी की तुलना में कहीं ज्यादा तेज होता है.
क्या बुजुर्गों में होता है इसका असर?
हालांकि, डिकैफ (बिना कैफीन वाली कॉफी) में यह असर नहीं देखा गया. इसका मतलब है कि कॉफी के अन्य तत्व नहीं, बल्कि कैफीन ही पेट की मूवमेंट को तेज करने वाला असली हीरो है. दिलचस्प बात यह है कि उम्र बढ़ने के साथ कॉफी का यह असर कम हो जाता है. बुजुर्गों में पाचन धीमा हो जाता है और शरीर कैफीन को धीरे-धीरे प्रोसेस करता है. इसलिए उन्हें सिर्फ कॉफी पर निर्भर न रहकर फाइबर पानी और हल्के व्यायाम को भी शामिल करना चाहिए.
दिन में कितनी कॉफी पिएं?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिन में 1–2 कप कॉफी ही पर्याप्त है. इसे सुबह या खाने के बाद पीना सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि यह gastrocolic reflex को एक्टिव करता है यानी शरीर को प्राकृतिक रूप से मल त्याग के लिए तैयार करता है. साथ ही, कॉफी के साथ पानी पीना, भारी क्रीम या चीनी से बचना और ब्लैक या लो-फैट कॉफी चुनना बेहतर रहता है.
कैफीन के अलावा, कॉफी में मौजूद पॉलीफेनॉल्स और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे तत्व भी आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं. इससे पाचन मजबूत होता है और पेट साफ रखने में आसानी होती है.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.