पाम ऑयल को लेकर लंबे समय से स्वास्थ्य से जुड़ी शंकाएं बनी हुई हैं. कभी इसे दिल के लिए खतरनाक बताया जाता है, तो कभी कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाला कहा जाता है. इन भ्रमों के बीच सच्चाई जानना जरूरी हो जाता है. इन्हीं सवालों के जवाब देने के लिए इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. वरुण बंसल ने पाम ऑयल से जुड़े आम मिथकों पर वैज्ञानिक दृष्टि से प्रकाश डाला है.
डॉ. बंसल के अनुसार, पाम ऑयल को केवल संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) के कारण अस्वस्थ मान लेना गलत है. उन्होंने कहा कि संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इसका उपयोग सुरक्षित है. इसका उच्च स्मोक पॉइंट और स्थिरता इसे भारतीय खाना पकाने के लिए उपयुक्त बनाती है.
अक्सर माना जाता है कि पाम ऑयल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है. डॉ. बंसल ने स्पष्ट किया कि सभी वनस्पति तेलों की तरह पाम ऑयल भी पूरी तरह कोलेस्ट्रॉल-फ्री होता है. कुल आहार की गुणवत्ता ही रक्त में कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित करती है.
दिल की बीमारियों से जोड़कर पाम ऑयल को लेकर कई आशंकाएं हैं. डॉ. बंसल ने बताया कि इसमें मौजूद टोकोट्रायनॉल्स एंटीऑक्सिडेंट गुण रखते हैं. वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, संतुलित मात्रा में सेवन करने से हृदय रोग का खतरा नहीं बढ़ता.
डॉक्टर ने इस धारणा को भी खारिज किया. उन्होंने कहा कि कोई भी तेल बार-बार अधिक तापमान पर गर्म करने या दोबारा इस्तेमाल करने से हानिकारक हो सकता है. यह जोखिम सभी तेलों में समान है, केवल पाम ऑयल तक सीमित नहीं.
डॉ. बंसल के मुताबिक, पाम ऑयल को तलने, भूनने और बेकिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है. रोजाना कुल तेल की मात्रा 2 से 3 चम्मच प्रति व्यक्ति पर्याप्त है. उन्होंने सलाह दी कि पाम ऑयल को सरसों, नारियल या ऑलिव ऑयल के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना बेहतर संतुलन देता है.